ओवरऑल हेल्थ के लिए सबसे अधिक जरूरी है योग और प्राणायाम। प्राणायाम में सांसों पर ध्यान दिया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों जगह होता है तनाव। सांस को नियंत्रित करने से तनाव और तनाव संबंधित अन्य कई स्थितियों को जैसे कि हाई और लो बीपी को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।
सांस पर नियंत्रण करने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज, योगासन और ध्यान के अभ्यास भी मदद कर सकते हैं। तनाव को कम करने में मदद करने और रिलैक्स को बढ़ावा देने के लिए सांस का उपयोग किया जा सकता है। हालिया अध्ययन भी इस ओर इशारा करते हैं कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज तनाव से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
क्या कहती है स्टडी (Study on stress)
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की मासिक मेडिकल जर्नल जेएएमए नेटवर्क जर्नल में तनाव पर की गई स्टडी को प्रकाशित किया गया। अध्ययन में पाया गया कि अन्य तनाव प्रबंधन तकनीकों की तुलना में ब्रीदिंग एक्सरसाइज तनाव, अवसाद और एंग्जाइटी को काफी कम कर देता है। इसमें ध्यान केवल इतना दिया जाना है कि रिदम के साथ सांस लिया जाना है।
वायु प्रवाह को नियंत्रित करती है
इसमें गले को छूने वाली सांस की सचेत अनुभूति का अनुभव करना शामिल है। प्रति मिनट दो से चार सांसों की धीमी सांस तकनीक वायुमार्ग प्रतिरोध को बढ़ाती है और वायु प्रवाह (airflow) को नियंत्रित करती है। स्टडी के अनुसार, भस्त्रिका इसमें सबसे अधिक कारगर है, जहां प्रति मिनट 30 सांस की दर से हवा को तेजी से अंदर लिया जाता है और जोर से बाहर निकाला जाता है।इसके अलावा, वज्रासन या साधारण बैठने की मुद्रा वेगस नर्व पर प्रभाव डालती है।
वेगस नर्व पर प्रभाव डालता है भस्त्रिका और वज्रासन (Bhastrika and Vajrasana impact on vagus nerve)
यह वेगस तंत्रिका (Vagus nerve) के माध्यम से काम करता है। यह मस्तिष्क से शुरू होती है और शरीर के विभिन्न हिस्सों तक जाती है। यह हृदय गति में कमी, ब्लड वेसल्स, हृदय की गतिविधि, फेफड़े और पाचन तंत्र, लिवर और प्रतिरक्षा प्रणाली रेगुलेशन का ख्याल रखता है।
यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सेंसिटिविटी, गतिशीलता और सूजन को नियंत्रित करता है। सांस एकमात्र सचेतन गतिविधि है, जो वेगस नर्व से जुड़ी है। वज्रासन या साधारण बैठने की मुद्रा वेगस नर्व पर प्रभाव डालती है। वज्रासन या साधारण बैठने की मुद्रा वेगस नर्व पर प्रभाव डालती है। ये आसन डाइजेस्टिव और सर्कुलेशन सिस्टम के लिए अच्छा माना जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर के लिए ॥ चंद्रभेदी प्राणायाम ॥
- सुखासन में बैठ जाएं
- कमर, गर्दन एवं पीठ सीधी रहे
- बाएं हाथ की अंगुलियों से दाएं नासिका छिद्र को बंद करें
- बाएं नासिका छिद्र से श्वास खींचें
- श्वास को क्षमतानुसार रोकें
- दाहिने नासिका छिद्र से श्वास छोड़ें
- इस प्रक्रिया को करीब 5 -10 मिनट तक रोज करें
लो ब्लड प्रेशर के लिए ॥ सूर्यभेदी प्राणायाम ॥
- सुखासन में बैठ जाएं।
- कमर, गर्दन व पीठ सीधी रखें।
- दाएं हाथ की अंगुलियों से बाएं नासिका छिद्र को बंद करें।
- दाहिने नासिका छिद्र से श्वास लें।
- कुछ देर श्वास रोकें।
- बाएं नासिका छिद्र से श्वास बाहर निकाल दें।
- क्षमतानुसार 5 से 10 मिनिट रोज इस प्रक्रिया को करें
सावधानी
- दिल के मरीज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी प्राणायाम ना करें।
- दोनो ही प्रक्रियाओं में यदि श्वास रोकने में असमर्थ हों तो केवल बताए गए नासिका छिद्र से श्वास लेकर दूसरे से छोड़ दें।