हाल ही में कुछ माध्यमों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने कलेक्टर रेट्स में 150% तक की वृद्धि कर दी है। यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यों से परे है। वास्तविकता यह है कि कलेक्टर रेट्स का संशोधन एक नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल बाजार मूल्य के अनुरूप पारदर्शी तरीके से की जाती है। यह बदलाव एक डेटा-आधारित और तर्कसंगत फार्मूले पर आधारित है, जिसमें हर क्षेत्र (सेगमेंट) की शीर्ष 50% रजिस्ट्रियों का विश्लेषण किया जाता है-जहां लेन-देन की राशि कलेक्टर रेट से अधिक होती है। इसी आधार पर नीचे दिए गए फार्मूले से रेट संशोधन किया गया है।
हरियाणा के 72% क्षेत्र में केवल 10% वृद्धि की
गौरतलब है कि हरियाणा की वित्तायुक्त सुमिता मिश्रा ने लेटर जारी कर कुछ दिन पहले ही संकेत देते हुए स्पष्ट किया था कि सरकार ने नए कलेक्टर रेट लागू करने का निर्णय तो कर लिया है, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले कलेक्टर रेट की सूची को सार्वजनिक करना, उस पर आमजन से आपत्तियां और सुझाव मंगवाना जैसी प्रक्रिया को पूरा करेगी। 72 फीसदी क्षेत्र में महज 10 फीसद की वृद्धि हुई हरियाणा में, सरकार का उद्देश्य पारदर्शी लेन-देन को बढ़ावा देना, ब्लैक मनी पर प्रभावी रोक लगाना।
यह दावा कि कलेक्टर दर में 130% से अधिक की वृद्धि हुई है, भ्रामक है और सच्चाई यह है कि हरियाणा के 72% क्षेत्र में केवल 10% वृद्धि की है। केवल 8.37% क्षेत्रों में वृद्धि 50% तक है और यह वृद्धि मालिकों द्वारा की गई वास्तविक रजिस्ट्री के मुकाबले है, जो 200% से 900% के बीच है। इस भारी वृद्धि को देखते हुए, 50% की वृद्धि भी बहुत कम है और वास्तविक वृद्धि से 4 से 15 गुना कम है।
किसान हमेशा अपनी जमीन की कलेक्टर दर को बढ़ाने की मांग करते हैं
किसान हमेशा अपनी जमीन की कलेक्टर दर को बढ़ाने की मांग करते हैं, ताकि भूमि अधिग्रहण के समय उन्हें अधिक पैसा मिल सके और जो कोई भी इस वृद्धि का विरोध करता है, वह किसान विरोधी है। यह स्पष्ट रूप से दोहराया जाता है कि कहीं भी दरों में 50% से अधिक की वृद्धि नहीं की गई है। वास्तव में, कई स्थानों पर केवल 10% या 15% तक ही संशोधन हुआ है। और इन नई दरों के बाद भी, अधिकांश स्थानों पर कलेक्टर रेट्स अब भी बाजार मूल्य से काफी कम हैं। सरकार का उद्देश्य पारदर्शी लेन-देन को बढ़ावा देना, ब्लैक मनी पर प्रभावी रोक लगाना, जनसामान्य को वास्तविक और न्यायसंगत मूल्य पर संपत्ति लेन-देन का, अवसर देना है।
पारदर्शिता और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई
सरकार का यह कदम जनहित को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिसमें पारदर्शिता और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है। सर्कल रेट या कलेक्टर रेट, संपत्ति की बिक्री के पंजीकरण के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम दर है। यह स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क की गणना के लिए एक संदर्भ मूल्य के रूप में कार्य करता है।
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सर्कल रेट का उपयोग करती है कि स्टाम्प शुल्क से बचने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में संपत्तियों का कम मूल्यांकन न किया जाए। यदि कोई लेन देन सर्कल रेट से कम कीमत पर होता है, तो खरीदार को सर्कल रेट के आधार पर स्टाम्प शुल्क का भुगतान करना होगा। कभी-कभी, सर्कल रेट वास्तविक बाजार दर से अधिक या कम हो सकता है, जिससे आधिकारिक दर और खरीदार द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि के बीच अंतर पैदा हो जाता है।
हरियाणा में कलेक्टर रेट के कल 2,46,812 सेगमेंट थे, जिनमें विभिन्न स्लॉट्स के अनुसार इस प्रकार से वृद्धि हुई है
- 1,77,731 सेगमेंट (72.01%) 0 से 35% स्लॉट में आए, जिनमें 10% की वृद्धि हुई।
- 19,966 सेगमेंट (8.09%) 35 से 70% स्लॉट में आए, जिनमें 15% की वृद्धि हुई।
- 10,985 सेगमेंट (4.45%) 70 से 100% स्लॉट में आए, जिनमें 20% की वृद्धि हुई।
- 11,078 सेगमेंट (4.49%) 100 से 150% स्लॉट में आए, जिनमें 30% की वृद्धि हुई।
- 6,393 सेगमेंट (2.59%) 150 से 200% स्लॉट में आए, जिनमें 40% की वृद्धि हुई।
- 20,659 सेगमेंट (8.37%) 200% से ऊपर के स्लॉट में आए, जिनमें 50% की वृद्धि हुई।