loader
The Haryana Story | चुनाव के दौरान दगाबाज़ी करने वाले नेता-कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार, सबक सिखाने के मूड में पार्टी हाईकमान

चुनाव के दौरान दगाबाज़ी करने वाले नेता-कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार, सबक सिखाने के मूड में पार्टी हाईकमान

पार्टी ने पार्टी से विश्वासघात करने और मझधार में छोड़ने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं को सबक सिखाने का फैसला लिया है

हरियाणा में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान विश्वासघात करने वालों और मझधार में छोड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब पार्टी हाई कमान ने सबक सिखाने का फैसला किया है। तमाम तरह के फीडबैक लेने के बाद यह सामने आया है कि पार्टी ऐसे किसी नेता या पदाधिकारी को चेयरमैन नहीं बनाएगी न ही कोई लाभ का पद, जिसने चुनाव में पार्टी के साथ दगाबाजी की या फिर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए पार्टी को बीच में ही छोड़ मझधार में ही छोड़ दिया।

बीजेपी की आंतरिक कमेटी की बनी बैठक में फैसला लिया जा चुका

पार्टी के कई सीनियर नेताओं के अनुसार लोकसभा विधानसभा चुनाव की सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाते हुए पार्टी ने पार्टी से दगाबाजी करने वाले नेता और कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार की है। बीजेपी की आंतरिक कमेटी की बनी बैठक में फैसला लिया जा चुका है। बता दें कि कई विभागों और निगमों के अलावा कई दिन में महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं जिन पर पार्टी के वफादार कार्यकर्ता और नेताओं की नियुक्ति की जानी है। इसमें मार्केट कमेटी, चेयरमैन, सीएम विडो प्रमुख, निगरानी कमेटी सहित कई ऐसे विभाग हैं जिसमें वर्कर एडजस्ट किए जाएंगे।

भाजपा ने 2 चुनावों की सर्वे रिपोर्ट पर एक लिस्ट तैयार की

अंदरूनी जानकारी से पता चला है कि 15 अगस्त के बाद पार्टी खाली पड़े पदों पर कभी भी नियुक्तियां कर सकती है। पार्टी हाई कमान करेगी फैसला चुनाव के बाद पार्टी को सर्वे में पता चला था कि पार्टी के कई नेताओं या कार्यकर्ताओं को चुनाव में टिकट नहीं मिली और उन्होंने पर्दे के पीछे पार्टी के ही आधिकारिक कैंडिडेट्स को चुनाव हारने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं से पार्टी चुनाव जीतने के करीब 10 महीने बाद भी लगातार दूरी बनाकर चल रही है। भाजपा ने 2 चुनावों की सर्वे रिपोर्ट पर एक लिस्ट तैयार की है। इसमें उन नेताओं और पदाधिकारियों के नाम है जिन्होंने चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को हराने का काम किया।

इनको पार्टी के कार्यक्रमों में भी तब तक आमंत्रित नहीं किया जा सकता

सभी भाजपा जिलाध्यक्षों को खास तौर पर मैसेज दिया गया है कि इनको पार्टी के कार्यक्रमों में भी तब तक आमंत्रित नहीं किया जा सकता, जब तक पार्टी हाई कमान की तरफ से हरी झंडी या कोई संकेत न मिले ने पार्टी छोड़ दी थी इतना ही नहीं किसी भी पद के लिए इनके नाम न भेजने की सलाह भी दी गई है। ऐसे में कई दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी, वर्कर और नेता हैं जो चेयरमैनी सहित कई पदों से दूर रह सकते हैं। भाजपा पूरे हरियाणा में करीब दो हजार से ज्यादा वर्करों को एडजस्ट करेगी। 

इन्होंने छोड़ा था पार्टी का साथ

चुनाव में कई नेताओं ने टिकट नहीं मिलने पर पार्टी का साथ छोड़ दिया था जिन में रेवाड़ी से सुनील राव, प्रशांत सन्नी, गुरुग्राम से नवीन गोयल, जीएल शर्मा। सोनीपत से अमित जैन, इंदु वलेचा के पति पूर्व पार्षद संजीव वलेचा, पानीपत से आशु सत्यवान शेरा, रोहतक से फतेह सिंह, हरेंद्र मोखरा, विकास सिवाच, मुकेश कुमार, पूर्व सरपंच रोहताश, नवीन उप्पल, राकेश कुमार। भिवानी से सुरेश ओड, शशि परमार।

करनाल से कर्ण देव कंबोज, जींद के सफीदों से बचन सिंह आर्य और यमुनानगर से देवेंद्र चावला, साढौरा से दाताराम, नीलोखेड़ी से मीना चौहानसिरसा से रणजीत चौटाला, आदित्य देवीलाल, कालांवाली से बलकौर सिंह, हिसार से पूर्व मंत्री एवं मौजूदा विधायक सावित्री जिंदल, बरवाला में जिला पार्षद महंत दर्शनगिरी, पूर्व मेयर गौतम सरदाना, उकलाना में पूर्व प्रत्याशी सीमा गैबीपुर, भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष तरूण जैन और शमशेर गिल का नाम भाजपा की लिस्ट में शामिल है।

भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस इन जिलों में ही रहने वाला

हरियाणा में पार्टी बेशक 48 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही, लेकिन पार्टी प्रदेश के पांच जिलों में विधानसभा चुनाव में खाता तक नहीं खोल पाई जिसके चलते पार्टी हाई कमान और राज्य नेतृत्व मंथन को मजबूर हुआ। पार्टी को रोहतक, झज्जर, फतेहाबाद, सिरसा और नूह में हारका सामना करना पड़ा पार्टी को यहां इन पांच विधानसभा जिलों में सभी 19 विधानसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि सिरसा और फतेहाबाद की सभी 8 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। रोहतक लोकसभा के अंतर्गत आने वाली सीटों पर हुड्डा फैक्टर ने काम किया। दोनों जिलों की 8 में से 7 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। यहां भाजपा दूसरे या तीसरे स्थान पर रही थी। इसलिए भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस इन जिलों में ही रहने वाला है।

Join The Conversation Opens in a new tab
×