आज के समय में हम ‘नारी सशिक्तकरण’ शब्द को बहुत बार सुनते हैं, लेकिन क्या यह सिर्फ एक नारा बनकर रह गया है? भारत में महिलाएं आज भी कई जगहों पर शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्णय लेने के अधिकार और स्वतंत्रता से वंचित हैं। जरूरत है कि हम इस मुद्दे को सिर्फ भाषणों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे व्यवहारिक रूप से अपनाएं।
गांवों में आज भी बेटियों की शिक्षा को महत्त्व नहीं दिया जाता। शादी की उम्र तक उन्हें घर के कामों तक ही सीमित कर दिया जाता है। अगर हम सच में बदलाव चाहते हैं, तो सबसे पहले सोच में बदलाव लाना होगा। बेटी को पढ़ाना, उसकी आवाज को सुनना और उसके फैसलों को मान देना – यही सच्चा सशिक्तकरण है।
आज की नारी डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस ऑफिसर, पायलट, नेता, शिक्षक और उद्यमी बन रही है। उसे सिर्फ मौका चाहिए, समर्थन चाहिए, और एक सुरक्षित माहौल चाहिए जहाँ वह बिना डर के अपने सपने पूरे कर सके।
सरकार, समाज और परिवार – तीनों को मिलकर काम करना होगा:
शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी
काम करने के अवसर बढ़ाने होंगे
सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होगा
"जब हर नारी को उसका हक मिलेगा, तभी ‘नारी सशिक्तकरण’ एक हकीकत बनेगा – सिर्फ शब्द नहीं।"
लेखिका:
कृष्णिका रावल
(बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्रा)