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The Haryana Story | पानीपत नगर निगम अधिकारियों और एसएचओ पर प्रॉपर्टी टैक्स घोटाले को दबाने का आरोप, ACB से जांच कराने की मांग

पानीपत नगर निगम अधिकारियों और एसएचओ पर प्रॉपर्टी टैक्स घोटाले को दबाने का आरोप, ACB से जांच कराने की मांग

लोकायुक्त को शिकायत भेज घोटाले की तत्काल एफआईआर दर्ज करके एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराने की मांग

लोकायुक्त जस्टिस हरी पाल वर्मा को शिकायत भेज कर आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स शाखा में हुए 4 करोड़ रुपये के प्रॉपर्टी टैक्स घोटाले की तत्काल एफआईआर दर्ज करके एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है। कपूर ने अपनी शिकायत में एसएचओ सिटी व नगर निगम अधिकरियों पर घोटाले को दबाने का आरोप लगाया है। शिकायत में बताया कि नगर निगम अधिकारियों ने पुलिस को शिकायत देकर पल्ला झाड़ लिया है, क्योंकि घोटाले में कई बड़े अधिकारियों के पीए शामिल हैं। तो दूसरी ओर एसएचओ सिटी पुलिस स्टेशन तीन महीने से शिकायत को दबा कर बैठे हैं। कोई गिरफ्तारी या कोई कारवाई तो दूर रही पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की।

जानें क्या है मामला

पानीपत नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स शाखा के कर्मचारियों ने रिकॉर्ड में जालसाजी व हेरा फेरी करके लाखों रुपये के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स वालों प्रॉपर्टी मालिकों के टैक्स घटा कर नाम मात्र कर दिये अथवा शून्य कर दिये । इसी तरह अवैध कालोनियों में स्थित सम्पतियों को वैध कालोनी में दर्शा कर प्रॉपर्टी आईडी व नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) जारी कर दी, ताकि क्रेता विक्रेता तहसील में रजिस्ट्री करवा सकें। इस घपले को करने के लिए प्रॉपर्टी टैक्स शाखा के कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों की यूजर आईडी का जम कर दुरूपयोग किया और निगम को करीब 4 करोड़ रुपये की राजस्व हानि की। 

निगम की जांच में घोटाला उजागर हुआ

पानीपत नगर निगम आयुक्त डा.पंकज यादव ने प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में चल रहे इस फजीर्वाड़े की जानकारी मिलते ही जॉइंट कमिश्नर कु. मनी त्यागी के नेतृत्व में टीम गठित करके जांच कराई गई। जाँच कमेटी ने फजीर्वाड़े की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट में जॉइंट कमिश्नर की पीए कुसुम नरवाल को फजीर्वाड़े का मुख्य आरोपी पाया। इसके इलावा भृष्टाचार के इस खेल में निगम के कई अन्य कर्मचारियों व दलालों के संलिप्त होना भी पाया। इस भृष्टाचार के विरुद्ध पिछले करीब तीन महीने से सिटी थाना पुलिस को शिकायत भी दे रखी है।
 
घोटाले में शामिल निगम कर्मचारियों, दलालों व फजीर्वाड़े से लाभन्वित हुए प्रॉपर्टी मालिकों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर के एंटी करप्शन ब्यूरो से जाँच कराई जाए। सरकार को पहुंचाई गई राजस्व हानि की रिक्वरी ब्याज सहित की जाए।
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