loader
The Haryana Story | उफनती यमुना में राकसेडा रकबे की 100 एकड़ से अधिक खड़ी फसल बर्बाद, किसानों में रोष

उफनती यमुना में राकसेडा रकबे की 100 एकड़ से अधिक खड़ी फसल बर्बाद, किसानों में रोष

हरियाणा यूपी पुल के नीचे भूमि कटाव ने 2000 फुट की लंबाई में 5 से 7 फुट रास्ते को अपनी चपेट में लिया,फसल बर्बाद होने पर किसानों ने शासन व प्रशासन के प्रति रोष व्यक्त किया

बुधवार को यमुना में पानी का जलस्तर कम हो गया हो, लेकिन भूमि कटाव ने जमीन को अपनी चपेट में लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी फिलहाल भी कटाव का कहर जारी है। यही कारण है कि यमुना उफान पर होने के चलते गांव राकसेडा रकबे मे 100 एकड़ से अधिक खड़ी फसल बर्बाद होने के बाद आहिस्ता-आहिस्ता जमीन कट कर यमुना के पानी में समा गई जिसको लेकर जहां किसान चिंतित है वही गांव सिंभलगढ़ के किसानों ने इसकी पुष्टि करते हुए नहरी विभाग के अलावा सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया।

जलस्तर कम होने पर भूमि कटाव का कहर जारी

दूसरी और हरियाणा यूपी पुल के नीचे आधा किलोमीटर पहले भूमि कटाव ने कहर बरपाते हुए खेतों की तरफ जाने वाले करीब 2000 फुट की लंबाई में 5 से 7 फुट रास्ते को अपनी चपेट में ले लिया जिससे किसानों को खेतों में जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है हालांकि विभाग की ओर से दूसरी और रास्ते की व्यवस्था करने की बात कही है वही कटाव को रोकने के लिए मजदूरों का सहारा लिया गया है जिसमें लगभग 20000 मिट्टी के कट्टे व अन्य इंतजाम किए गए हैं अब देखना यह है कि आने वाले समय में यमुना उफान पर होने के कारण विभाग कटाव को रोकने में कामयाब होगा या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा। जलस्तर कम होने पर भूमि कटाव का कहर जारी है। 

हर साल अगस्त के आखिरी महीने व सितंबर महीने में यमुना उफान पर होती

उल्लेखनीय है कि हर साल अगस्त के आखिरी महीने व सितंबर महीने में यमुना उफान पर होती है। 2 साल बाद यमुना उफान पर होने के चलते किसानों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि यमुना उफान से पहले हरियाणा यूपी पुल के नीचे व गांव राकसेडा रकबे में नहरी विभाग की ओर से कोई उचित कदम नहीं उठाया गया जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल राकसेडा रकबे में काफी दिन पहले पुरानी ठोकर की रिपेयरिंग करने के लिए विभाग की ओर से ठेका छोड़ा गया था लेकिन ठेकेदार द्वारा आज तक काम शुरू नहीं किया गया हालांकि अधिकारियों ने कई बार ठेकेदार को काम शुरू करने के लिए अवगत कराया लेकिन ठेकेदार है कि टस से मस नहीं हुआ। 

आहिस्ता-आहिस्ता जमीन कट कर यमुना के पानी में समा गई

गांव सिभलगढ के सरपंच सतीश कुमार ने बताया था कि नहरी विभाग को रकबे में पांच नई ठोकर व पुरानी ठोकर की रिपेयरिंग करवाने की मांग की गई थी लेकिन विभाग ने यहां पर कोई व्यवस्था नहीं की। बुधवार को सरपंच ने बताया कि परिणाम यह हुआ किया की यमुना उफान पर होने के कारण गांव के बांध के नजदीक पानी खड़ा हो गया, वहीं भूमि कटाव ने इस कदर कहर बरपाया की देखते ही देखते किसानों की आंखों के सामने हरियाणा की तरफ करीब 40 - 45 एकड़ व यमुना पार राकसेडा रकबे में 100 एकड़ से अधिक खड़ी धान की फसल व अन्य फसल बर्बाद होने व आहिस्ता-आहिस्ता जमीन कट कर यमुना के पानी में समा गई। इस मंजर को देख किसान काफी परेशान है जिनके लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है लेकिन नहरी विभाग व शासन प्रशासन की ओर से आज तक कटाव को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। 

फसल बर्बाद होने से किसान काफी चिंतित

वहीं गांव सिंभलगढ के किसान सतपाल शमशेर धर्म सिंह जयपाल सुखबीर आदि ने बताया कि यमुना उफान से लेकर अब तक 100 से अधिक एकड़ में खड़ी फसल बर्बाद होकर यमुना में समा गई जिसमें किसान सतपाल की साढ़े 9 एकड़ शमशेर की 8 एकड़ राम सिंह की चार एकड़ जयपाल की साढ़े 4 एकड़ आदि किसानों की धान व अन्य फसल बर्बाद हो गई। फसल बर्बाद होने से किसान काफी चिंतित है उन्होंने आरोप लगाया कि यहां पर आज तक नहरी विभाग के अधिकारियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा करना उचित नहीं समझा जिसको लेकर किसानों में शासन व प्रशासन के प्रति रोष पनप रहा है। उन्होंने बताया कि यमुना उफान से पहले तकरीबन प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण करके स्थिति का जायजा ले रहे हैं लेकिन इस बार किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने कोई सुध नहीं ली।

स्थिति पर नजर रखी जा रही

इस संबंध मे नहरी विभाग के जेई प्रवीन ने बताया कि बुधवार को यमुना में पानी का जलस्तर कम हो गया है। उन्होंने बताया कि यमुना उफान पर होने के कारण हरियाणा यूपी पुल के नीचे करीब आधे किलोमीटर पहले भूमि कटाव के कहर के चलते खेतों की तरफ जाने वाले 2000 फुट की लंबाई में 5 से 7 फुट रास्ते को अपनी चपेट में ले लिया जिसको लेकर दूसरी तरफ रास्ता बनाया गया है ताकि किसानों को खेतों में जाने के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही कटाव को रोकने के लिए लगभग 20000 मिट्टी से भरे कट्टे रखे गए हैं उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर फसल बर्बाद होने की बात सामने आई हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

Join The Conversation Opens in a new tab
×