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The Haryana Story | स्कूली वाहन हादसे बढ़ा रहे अभिभावकों की चिंता, मासून जिंदगियों पर भरी पड़ रही अनफिट वाहन और अप्रशिक्षित चालकों की लापरवाही

स्कूली वाहन हादसे बढ़ा रहे अभिभावकों की चिंता, मासून जिंदगियों पर भरी पड़ रही अनफिट वाहन और अप्रशिक्षित चालकों की लापरवाही

सरकार और प्रशासन हर साल स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच के लिए अभियान चलाते हैं, लेकिन यह केवल हादसों के समग याद आते हैं

प्रतीकात्मक तस्वीर

स्कूली वाहनों से हादसे अभिभावकों की चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। अनफिट वाहन और अप्रशिक्षित चालकों की लापरवाही मासूम जिंदगियां छिन रही है। सरकार और प्रशासन हर साल स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच के लिए अभियान चलाते हैं, लेकिन यह केवल हादसों के समग याद आते हैं। हादसे के कुछ दिन बाद सिर्फ ड्राइवर तक ही कार्रवाई करके आरटीर, पुलिस और प्रशासन आंख मूंदे लेता है। मॉडल द्वइविंग एंड ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमडीडीएआरआई) द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार 2020 से देश में प्रति वर्ष दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। 2020-21 (अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक) में 553 दुर्घटनाएं हुई। इसके बाद 2021-2022 में 583 और 2022-2023 में 664 दुर्घटनाएं हुई। 2023 में छह महीनों के भीतर राज्य में 318 दुर्घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।

खासकर स्कूल वाहनों के मामले में तो विभाग लापरवाही दिखाता ही है

अध्ययन में 2020 से प्रति वर्ष दुर्घटनाओं की कुल संख्या में निरंतर वृद्धि का खुलासा किया है। 2020-21 (अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक) में 2553 दुर्घटनाएं हुई. इसके बाद 2021-2022 में 583 और 2022-2023 में 664 दुर्घटनाएं हुई। वहीं, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय भी किसी शहर या गांव में बड़ा हादसा होने पर ही जागता है। खासकर स्कूल वाहनों के मामले में तो विभाग लापरवाही दिखाता ही है। घटना के कुछ दिन तक तो जांच अभियान चलता है, इसके बाद कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाती है। वैसे स्कूल वाहनों, बस चालक, परिचालक, सहायक, बसों में लगे कैमरे व कागजों की नियमित जांच जारी है। 

स्कूल बस हादसों के लिए स्कूल संचालकों को भी गंभीरता से देखना होगा

हिसार बार एसोसिएशन के सदस्य एडवोकेट चजरंग इंदल ने स्कूल बस हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को सख्ताई से लागू करने की बात कही है। स्कूल बस हादसों के लिए स्कूल संचालकों को भी गंभीरता से देखना होगा। कई बार रकूल संचालक अभिभावकों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देते, इसके चलते बस चालक लापरवाह हो जाते हैं। समय-समय पर स्कूल बसों की जांच जरूरी है। स्कूल प्रबंधन से भी नियमित जानकारी लेना और मॉनिटरिंग भी आवश्यक है। 

पिछले ढाई साल में मुख्य निजी स्कूल बसों के मुख्य हादसे

  • अक्टूबर 2023 में हिसार के एक निजी स्कूल की बस नैनीताल के घटगढ़ में राबई में गिर गई थी। घटना में शिक्षक, 1 छात्र, 4 महिलाओं समेत कुल 7 लोग मारे गाए थे।
  • दिसंबर 2024 में सिरसा के गांव बनी में स्कूल बस 30 छात्रों को लेकर निकली थी। बालक ने वाहन को क्रॉस करने की प्रयास किया तो हादसा हो गया। इसमें 5 बच्चे घायल हो गए थे।
  • 11 अप्रैल 2024 को ईद के दिन महेंद्रगढ़ के कनीना क्षेत्र में बालक की लापरवाही से स्कूल बस पेड़ से टकराई। बस पलटने के बाद 6 स्कूली छात्र छात्राओं की जान चली गई थी। एक बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। 35 से ज्यादा बच्चे घायल हुए, जिनमें 15 बन्ने बुरी तरह जख्मी हो गए थे। बस में कुल 45 बच्चे थे। बाद में ड्राइवर को गिरफ्तार कर हटा दिया गया था।
  • 16 फरवरी 2025 को कैथल के नौच गांव में स्टीयरिंग में दिक्कत आने से स्कूल बस सतलुज यमुना लिंक नहर में जा गिरी थी, जिससे 8 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए। बस चालक और परिचालक भी भायल हो गए थे।
  • मई 2025 को सोनीपत में जैसे ही बब्बों को लेकर अस निकली तो कर्मचारी अमित स्कूल का गेट खोलने लगा। लेकिन चालक ने कर्मचारी पर बस चढ़ा दी। हालांकि, पुलिस ने केस जरूर दर्ज किया, लेकिन चालक की लापरवाही से परिवार का सहारा छिन गया।
  • 14 जुलाई 2025 हिसार के आदमपुर से सटे सदलपुर में बालक की लापरवाही से निजी स्कूल बस सड़क से नीचे गड्ढे में उतर गई थी। इसमें कई बच्यों को चोटें आई। बस में 50 बच्चे सवार थे। 
  • 8 अगस्त 2025 को झब्बर के विरधाना गांव के पास टायर फटने से स्कूल बस पलट गई, जिसमें 8 साल के छात्र हितेष की मौत हुई।
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