पानीपत शहर में एक चौंकाने वाली चिकित्सीय घटना सामने आई है, जिसने लोगों को दंत चिकित्सा की सावधानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-12 निवासी मुकेश नारंग रूट कैनाल कराने के लिए एक डेंटिस्ट के पास गए थे। इलाज के दौरान उनके मुंह में इस्तेमाल की जाने वाली एक सुई गलती से गिर गई, जिससे परिजनों और चिकित्सकों में हडक़ंप मच गया। घटना के बाद डेंटिस्ट तत्काल उन्हें पानीपत के एक बड़े अस्पताल लेकर गए।
वहां एक्स-रे सहित कई तरह की जांच की गई, लेकिन किसी भी रिपोर्ट में सुई का कोई पता नहीं चल पाया। इसके बाद और अधिक सटीकता के लिए पानीपत के एक नामी सेंटर से भी जांच कराई गई, मगर वहां भी सुई का कोई सुराग नहीं मिला। मुकेश नारंग के मामा सरदार फतेह सिंह ने हार नहीं मानी और जांच की रिपोर्ट व लिंक रोहतक के एक प्राइवेट अस्पताल में भेजी। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने ध्यानपूर्वक जांच कर छाती व अन्य हिस्सों में सुई की मौजूदगी की पुष्टि की। हैरानी की बात यह रही कि तब तक मरीज को किसी प्रकार की पीड़ा या तकलीफ महसूस नहीं हुई थी।
पुष्टि मिलने के बाद सरदार फतेह सिंह तुरंत अपने भांजे को लेकर रोहतक पहुंचे। वहां सूक्ष्म उपकरणों की मदद से सुई को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने अत्यधिक सावधानी बरती। अंतत: सुई बाहर निकलते ही मरीज व परिजनों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने दंत चिकित्सा में लापरवाही के गंभीर खतरों की ओर इशारा किया है। चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे मामलों में तुरंत उच्च स्तरीय जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
related
खतरे में जिंदगियां: अवैध पटाखा गोदाम में धमाके से हिलीं कईं मकानों की नींव, मलबे की चपेट में आई बच्ची
अमर हुआ खाकी का फर्ज: ब्रेन डेड होने के बाद भी कुलदीप ने निभाया 'रक्षक' का धर्म, अंगदान की पेश की मिसाल
आबादी के करीब मंडराया तेंदुआ, शिकार मुंह में दबोचे दिखा, प्रतापनगर के मांडेवाला गऊशाला क्षेत्र में दहशत
Latest stories
CISF की जांबाज खिलाड़ी ने चीन में गाड़ा जीत का झंडा, रितु श्योराण की कप्तानी में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता गोल्ड
पानीपत के 35 गांवों की बदलेगी सूरत, 'मास्टर प्लान' तैयार, जानिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का 'मिशन विलेज'
फिरोजपुर झिरका में सीवर की जहरीली गैस ने छीनी दो मजदूरों की जिंदगी, ठेकेदार फरार, जिम्मेदार कौन?