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The Haryana Story | हरियाणा में पब्लिक हेल्थ विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, मुख्यालय पर बने रहने और 5 सितम्बर तक कड़ी निगरानी के निर्देश

हरियाणा में पब्लिक हेल्थ विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, मुख्यालय पर बने रहने और 5 सितम्बर तक कड़ी निगरानी के निर्देश

यमुना, घग्गर, मारकंडा डेंजर लेवल पर, अधिकारियों-कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके

हरियाणा में बारिश ने हालात बहुत बिगाड़ दिए हैं। लगातार हो रही तेज बरसात ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। पब्लिक हेल्थ विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। हरियाणा सरकार ने भारी बारिश की चेतावनी के बीच सभी फील्ड अधिकारियों को मुख्यालय पर बने रहने और 5 सितम्बर तक कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

बारिश और बाढ़ का सबसे ज्यादा असर किसानों पर

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को सभी मंडल आयुक्तों, रेंज आईजीपी, एडीजीपी, उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों तथा सब डिवीजन मजिस्ट्रेट को लिखे एक पत्र में कहा है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा आगामी दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की आशंका भी जताई गई है। बारिश और बाढ़ का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 2.50 लाख एकड़ फसलें खराब हो चुकी हैं और करीब 40 हजार किसान प्रभावित हुए हैं। खेतों में पानी भरने से धान, कपास और अन्य फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं। हिसार में मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि प्रशासन हर स्तर पर इंतजाम कर रहा है, लेकिन इस बार बरसात की तीव्रता बहुत ज्यादा है।

ऑरेंज अलर्ट: फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम, नूंह, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, जींद, भिवानी और चरखी दादरी।

अंबाला में मारकंडा, बेगना और रूण नदियां उफान पर

बारिश के कारण प्रदेश की नदियां और नाले उफान पर हैं। यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज पर पानी का स्तर 3.29 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है, जो इस सीजन का सबसे ज्यादा है। सभी फ्लड गेट खोल दिए गए हैं। इससे दिल्ली के निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बढ़ गया है। अंबाला में मारकंडा, बेगना और रूण नदियां उफान पर है। सोमवार को मारकंडा नदी में 45 हजार क्यूसेक पानी दर्ज हुआ। कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी खतरे के निशान से केवल 1 मीटर नीचे बह रही है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर NDRF की टीम बुलाई है। 

घग्गर नदी डेंजर लेवल पर बह रही

पंचकूला, सिरसा, फतेहाबाद और कैथल में घग्गर नदी डेंजर लेवल पर बह रही है। अंबाला की टांगरी नदी फिलहाल सामान्य है, लेकिन हाल ही में ओवरफ्लो होकर 17 कॉलोनियों में पानी भर चुकी है। लगातार बारिश से कई जगह हादसे भी हो रहे हैं। पंचकूला में 1 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल बह गया, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया। सिरसा में दो मकानों की दीवारें गिर गईं और एक माइनर टूटने से 50 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। यमुनानगर में एक मकान की छत गिरने से बड़ा हादसा टल गया, चार लोग बाल-बाल बचे। 

भागड़ा से आती बासड़ा नहर टूट गई

हिसार जिले के बालसमंद में भागड़ा से आती बासड़ा नहर टूट गई, जिससे 100 एकड़ खेत पानी में डूब गए। कैथल के सोंगल गांव और नारनौल के एक निजी स्कूल में पानी भर गया। सिरसा में हालात बिगड़ ने पर सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और नालों के पास न जाएं। खासतौर पर यमुना किनारें बसे गांवों में लोगों और उनके पशुओं को दूर रहने की चेतावनी दी गई है। कई जिलों में सायरन बजाकर अलर्ट किया गया है।

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