गत माह 12 अगस्त 2025 को हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव विकास गुप्ता, आई.ए.एस. की हस्ताक्षरित सील से प्रदेश सरकार के गजट में प्रकाशित एक नोटिफिकेशन मार्फ़त पानीपत जिले में स्थापित निवर्तमान समालखा नगरपालिका (न.पा.) का दर्जा बढ़ाकर नगर परिषद (न.प.) कर दिया गया। इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि उपरोक्त ताज़ा नोटिफिकेशन के बाद समालखा प्रदेश की 24 वीं नगर परिषद बन गई है।
विगत छह वर्षो में प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा पहले अम्बाला नगर निगम के क्षेत्र में परिवर्तन कर अम्बाला सदर (कैंट ) में नई न.प. और फिर पंचकूला नगर निगम की सीमा में बदलाव कर कालका और पिंजौर दोनों क्षेत्रों के लिए संयुक्त नई नगर परिषद स्थापित की गयीं जबकि इसी दौरान पहले झज्जर न.पा. फिर नूहं न.पा. और अब समालखा न.पा. का दर्जा बढ़ाकर नगर परिषद किया गया है। अब प्रदेश में 24 नगर परिषद और 52 नगर पालिकाएं हो गई हैं।
मौजूदा समालखा नगर पालिका सदन का कार्यकाल जुलाई-अगस्त, 2027 तक
बहरहाल, निवर्तमान समालखा नगर पालिका के नगर परिषद के तौर पर अपग्रेड करने के समय पर गंभीर कानूनी सवाल उठाते हुए हेमंत ने बताया कि आज से सवा तीन वर्ष पूर्व जून, 2022 में जब हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश की 18 नगर परिषदों और 28 नगर पालिकाओ के आम चुनाव कराये गए थे, तब उनमें समालखा नगर पालिका के तौर पर आम चुनाव कराये गए थे एवं चुनाव सम्पन्न होने पश्चात 4 जुलाई, 2022 में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा समालखा नगर पालिका के प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष अशोक कुमार और पालिका क्षेत्र के सभी 17 वार्डो से निर्वाचित सदस्यों (जिन्हें आम भाषा में पार्षद या कोंसलर कहा जाता है हालांकि हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 में यह शब्द नहीं है ) के नामों की निर्वाचन नोटिफिकेशन प्रदेश के शासकीय गजट में प्रकाशित की गई थी जिस कारण मौजूदा समालखा नगर पालिका सदन का कार्यकाल जुलाई/अगस्त, 2027 तक अर्थात करीब दो वर्ष शेष है।
समयपूर्व कानूनन भंग किया जा सकता है
हेमंत ने बताया कि हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 12 के अनुसार और भारत की संविधान के अनुच्छेद 243 यू(1) के अंतर्गत हर निर्वाचित नगर निकाय का कार्यकाल उसकी पहली आयोजित बैठक से पांच वर्ष तक होता है, हालांकि उसे समयपूर्व कानूनन भंग किया जा सकता है। 1973 कानून की धारा 254 में मौजूदा निर्वाचित नगरपालिका को राज्य सरकार द्वारा कुछ विशेष और विकट परिस्थितियों में समय पूर्व भंग करने का प्रावधान तो है, परन्तु उसमें ऐसा कहीं उल्लेख नहीं है कि अगर किसी निर्वाचित नगर पालिका का दर्जा बढ़ाकर प्रदेश सरकार द्वारा नगर परिषद किया जाता है, तो इससे वह स्वत: भंग हो जायेगी।
वैसे भी किसी मौजूदा निर्वाचित नगर निकाय का दर्जा अपग्रेड करने मात्र से उस निकाय को भंग नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा करना पूर्णतया अलोकतांत्रिक होगा। इस प्रकार जब तक समालखा नगर पालिका का मौजूदा कार्यकाल जुलाई/अगस्त, 2027 तक पूरा नहीं हो जाता, तब तक उसे नगर परिषद के तौर पर अपग्रेड करने पर गंभीर कानूनी सवाल उठता है। अब शहरी स्थानीय निकाय विभाग इस पर क्या कार्रवाई करता है, यह देखने लायक होगा।
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