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The Haryana Story | प्रदेश के 13 जिलों में सेम की समस्या : 721 गांवों की 5.27 लाख एकड़ भूमि हो रही बंजर, सैलजा बोलीं - उचित कदम उठाए सरकार

प्रदेश के 13 जिलों में सेम की समस्या : 721 गांवों की 5.27 लाख एकड़ भूमि हो रही बंजर, सैलजा बोलीं - उचित कदम उठाए सरकार

कहा-जलनिकासी का उचित प्रबंध न होने पर 13 जिलों में बढ़ती ही जा रही है सेम समस्या

सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि प्रदेश के 13 जिलों में सेम समस्या के चलते 721 गांवों की 5.27 लाख एकड़ भूमि बंजर हो रही, यह समस्या जलनिकासी का उचित प्रबंध न किए जाने के चलते पैदा हो रही है, सरकार इस दिशा में उचित कदम उठाकर किसानों को सेम की समस्या से निजात दिला सकती है, भूमि उपचार के बाद इसे खेती योग्य बनाया जा सकता है। सेम के कारण कुछ जिलों में जमींदार किसान दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करने को विवश हो रहे हैं।

प्रदेश में सेम की समस्या वर्ष 1970 में सामने आई

मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा है कि प्रदेश में सेम की समस्या वर्ष 1970 में सामने आई, सेम के साथ साथ भूमि में लवणता बढ़ती चली गई और खेती बंजर होने से किसानों के हाथों से निकल गई। उस भूमि पर किसान कुछ भी नहीं कर सकता। हालात ये है कि जो किसान कभी अच्छा जमींदार हुआ करता था वह दूसरे के खेतों में मजदूरी करने को बाध्य हो गया और कुछ किसान दूसरे किसानों की भूमि हिस्से पर लेकर खेती करने लगे। वर्ष 1995 में आई बाढ़ ने हालात और विकट कर दिए और सेमग्रस्त भूमि का क्षेत्रफल बढ़ गया। अगर समय पर सरकार की ओर से सेमग्रस्त प्रभावित क्षेत्र में जलनिकासी का उचित प्रबंध किया गया होता तो आज अधिकतर भूमि का बचा लिया गया होता। 

खामियाजा आज भी किसानों को भुगतना पड़ रहा

आज प्रदेश में रोहतक, झज्जर, सोनीपत, भिवानी, हिसार, जींद, चरखी दादरी, फतेहाबाद, नूंह, सिरसा, पलवल, फरीदाबाद में लाखों एकड़ भूमि सेम की चपेट में आ गई। सांसद कुमारी सैलजा का कहना है कि भूमि सुधार के लिए अलग से निगम का गठन किया हुआ है, सरकार को इस दिशा में उचित कदम उठाना चाहिए क्योंंकि प्रदेश में वैसे भी कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है।

इस समय हिसार में 53520, चरखी दादरी में 13235, भिवानी में 18089, नूंह में 20927, झज्जर में 141875, सोनीपत में 24250 और रोहतक में 195900 एकड़ भूमि सेमग्रस्त हो चुकी है। हिसार, फतेहाबाद और सिरसा की सेमग्रस्त भूमि को बचाने के लिए हिसार-घग्घर ड्रेन का निर्माण किया गया, जो आज किसानों की गले की फांस बना हुआ है। इसमें आने वाली बाढ़ से खेती पूरी तरह से तबाह हो जाती है, क्योंकि इस ड्रेन को घग्घर नदी से जोड़ा जाना था पर ऐसा किया ही नहीं गया जिसका खामियाजा आज भी किसानों को भुगतना पड़ रहा है। 

सिरसा-फतेहाबाद और सिरसा-हिसार मार्ग पर स्ट्रीट लाइट को लेकर सांसद ने गडकरी को लिखा पत्र 

सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर सिरसा-फतेहाबाद एवं सिरसा-हिसार मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। सांसद ने कहा कि सिरसा और फतेहाबाद नगरों के प्रवेश द्वार (एंट्री पॉइंट्स) पर संकेतक बोर्ड तो लगाए गए हैं, परंतु स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था न होने से रात के समय राहगीरों एवं वाहन चालकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

ऐसे में सिरसा-हिसार बाईपास तथा सिरसा-फतेहाबाद मार्ग पर दोनों ओर स्ट्रीट लाइट लगाई जाए, नगर के प्रवेश द्वार से लेकर भीतरी हिस्से तक पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था हो। सिरसा-हिसार रोड पर स्थित नया सिरसा क्षेत्र में भी तेज़ी से विकास हो रहा है, यहां भी देर रात तक आवागमन रहता है, इसलिए मोतीलाला से सिद्धरपुर मोड़ तक स्ट्रीट लाइट लगाना अति आवश्यक है। सांसद ने मांग की है कि इन विषयों पर प्राथमिकता से कार्यवाही की जाए, ताकि स्थानीय जनता और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यातायात की सुविधा मिल सके।

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