हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में रविवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 20 स्थित गुरु रविदास गुरुद्वारे में एक महापंचायत का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान, पूर्व सांसद और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के प्रमुख राजकुमार सैनी के एक बयान से हंगामा मच गया। सभा को संबोधित करते हुए, पूर्व सांसद और विवादास्पद नेता राजकुमार सैनी ने महर्षि वाल्मीकि को ब्राह्मण बताया तो हंगामा शुरू हो गया। महापंचायत ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए डीजीपी शत्रुजीत कपूर को हटाने की मांग की और कहा कि ऐसा न करने पर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन होंगे। महापंचायत के बाद लोग हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष को ज्ञापन सौंपने गए, पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।
पोस्ट मार्टम पर कोई सहमति नहीं बन पाई
बाद में, हरियाणा के राज्यपाल प्रो असीम घोष ने हरियाणा सीआईडी के एडीजीपी सौरभ सिंह के साथ दिवंगत वाई पूरन कुमार की पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार से करीब 20 मिनट तक मुलाकात की। वहीं छह दिन बीत जाने के बाद भी पूरन कुमार के पोस्ट मार्टम पर कोई सहमति नहीं बन पाई। गौरतलब है कि चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर में कुछ बदलाव किए हैं जिससे मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं और मजबूत हो गई हैं। एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) अब धारा 3(2)(5) को धारा 3(2)(5) से बदल दिया गया है, जिसमें आजीवन कारावास और जुमार्ने का प्रावधान है। जबकि एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(1) में पोच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मीडिया से बातचीत में कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा, हम आईपीएस पूरन कुमार के परिवार से लगातार टच में हैं।
रोहतक के एसपी को पोस्टिंग से हटा दिया गया था
परिवार के अनुरोध पर रोहतक के एसपी को पोस्टिंग से हटा दिया गया था। इस बीच, अनुसूचित जाति समुदाय द्वारा गठित 31 सदस्यीय समिति के सदस्य गुरमेल सिंह ने कहा कि परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें नौकरी के वादे से शांत नहीं किया जा सकता। सरकार परिवार की भावनाओं से खेलने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद शनिवार को एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें पूरन कुमार का शव चंडीगढ़ के सेक्टर 11 स्थित मकान नंबर 116 के साउंडप्रूफ बेसमेंट कमरे में सोफे पर नजर आ रहा है और उनके सिर, नाक और मुंह से खून बह रहा है। उनकी टी-शर्ट भी खून से सनी हुई है। पूरन कुमार अपने दाहिने हाथ में पिस्तौल पकड़े हुए हैं।
आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई
पंजाब आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार के घर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एक आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या एक गंभीर घटना है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि छह दिन बाद भी आईपीएस अधिकारी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरियाणा के डीजीपी को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि पीड़ित परिवार की मांगों को सुना जाए और पूरा किया जाए और परिवार को न्याय दिलाया जाए। देश भर कांग्रेस पार्टी ये मांग कर रही है।
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