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The Haryana Story | इंजीनियरिंग से लेकर मछली के प्रोडक्ट का ब्रांड बनाने तक का नीरज चौधरी का सफर

इंजीनियरिंग से लेकर मछली के प्रोडक्ट का ब्रांड बनाने तक का नीरज चौधरी का सफर

एनसीआर जैसे बड़े शहरों में 300 से ज्यादा आउटलेट में बिक रहे उनके द्वारा बनाए गए मछली के कांटा रहित प्रोडक्ट

आज के समय में हर कोई अच्छी पढ़ाई करके एक अच्छी जॉब लेना चाहता है जिसके लिए विद्यार्थी इंजीनियरिंग, डॉक्टरी जैसी पढ़ाई करते हैं ताकि वह अपने लिए अच्छा नौकरी का पैकेज ले सके। लेकिन अब युवाओं की सोच बदल रही है। भारत के युवा अच्छी पढ़ाई करके नौकरी में जाने की बजाय व्यापार करना ज्यादा बेहतर समझते हैं। उन्हीं का एक उदाहरण हरियाणा के करनाल जिले के बुटाना गांव के नीरज चौधरी हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके अपने पिता के द्वारा स्थापित मछली पालन व्यवसाय को अपनाया और उसे नई बुलंदियों तक पहुंचाया।

2012 में मैकेनिकल में की थी बीटेक इंजीनियरिंग

नीरज चौधरी ने बताया कि उन्होंने 2012 में मैकेनिकल बीटेक इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म की। इसके बाद उन्होंने नौकरी नहीं की बल्कि अपने पिता के स्थापित मछली पालन व्यवसाय को आगे बढ़ाया। पढ़ाई के दौरान भी वह अपने पिता से मछली पालन के गुर सीखते रहते थे।

2014 में लगाया गया भारत का पहला RAS सिस्टम

नीरज चौधरी ने बताया कि उन्होंने परंपरागत तरीके से अलग कुछ नया करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने करीब 28 से 29 देशों का दौरा किया, जिनमें यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इसराइल शामिल हैं। फिर उन्होंने 2014 में अपने फार्म पर देश का पहला Recirculatory Aquaculture System (RAS) लगाया। 

RAS से 12 गुना होता है मछली

उत्पादन उन्होंने बताया कि यह तकनीक एक एकड़ से भी कम भूमि में मछली पालन की सुविधा देती है, जिसमें उत्पादन 12 गुना तक बढ़ जाता है। इसके साथ ही इसमें 90% पानी रीसायकल होता है।

हजारों किसानों को किया मोटिवेट

RAS सिस्टम को देखने देशभर से हजारों मछली पालक नीरज के फार्म पर पहुंचे। नीरज ने उन्हें प्रशिक्षण देकर आधुनिक तकनीक से मछली पालन के लिए प्रेरित किया। 

खुद का ब्रांड किया खड़ा

नीरज चौधरी ने “Fish Bite” के नाम से अपना खुद का ब्रांड शुरू किया, जिसमें मछली से बने प्रोटीन युक्त और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। 300 से ज्यादा आउटलेट पर बिक रहे प्रोडक्ट आज उनके उत्पाद देशभर के 300 से ज्यादा बड़े शहरों के आउटलेट पर बिक रहे हैं। वह अन्य मछली पालकों को भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं। 

करीब 35 प्रकार के बनाते हैं प्रोडक्ट, कांटा रहित होते हैं सभी प्रोडक्ट

उन्होंने मछली में कांटा होने की समस्या को ध्यान में रखते हुए कांटा रहित मछली उत्पाद तैयार किए हैं। आज वे करीब 35 प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं, जिन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

16 प्रकार की मछली पालन, पांच राज्यों में फैला काम

वह मीठे पानी की 16 प्रजातियों की मछलियों का पालन करते हैं और उनका व्यवसाय पाँच राज्यों में फैला हुआ है। उनका सालाना कारोबार करोड़ों में है।

मछली पालन में पिता को मिल चुका है पद्मश्री अवार्ड

नीरज चौधरी पद्मश्री अवार्डी सुल्तान सिंह के पुत्र हैं। सुल्तान सिंह को 2019 में मछली पालन में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। नीरज अपने पिता के साथ मिलकर मछली पालन को नए आयाम देने और हजारों किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

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