पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से मोटर व्हीकल एक्ट में प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) से संबंधित चालानों की राशि को तर्कसंगत बनाने की मांग की है। कुमारी सैलजा ने कहा कि हाल के दिनों में हरियाणा के अनेक शहरों सहित देशभर में दोपहिया वाहनों पर 10,000 से 15,000 तक के प्रदूषण चालान काटे जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित और आम जनता पर आर्थिक अत्याचार है।
मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत अन्यायपूर्ण
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई सेकेंड-हैंड स्कूटी या मोटरसाइकिल की कीमत ही 20,000 के आसपास होती है, ऐसे में 10,000 का चालान गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्कूटी और मोटरसाइकिल आम आदमी के आवागमन का प्रमुख साधन है। यह वर्ग पहले ही महंगाई और बढ़ते ईंधन दामों से परेशान है, ऐसे में इतनी भारी जुर्माना राशि उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही है।
स्कूटी/मोटरसाइकिल के लिए चालान 500 से 1000 तक सीमित किया जाए
कुमारी सैलजा ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मांग की है कि दोपहिया वाहनों के प्रदूषण चालान की राशि वाहन की क्षमता (सीसी) के अनुसार तय की जाए। 100 से 150 सीसी तक की स्कूटी/मोटरसाइकिल के लिए चालान 500 से 1000 तक सीमित किया जाए। वास्तविक प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों जैसे डीजल ट्रक, थ्री-व्हीलर, फैक्ट्रियां और ईट भट्टे पर अधिक निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य जनहित में होना चाहिए, न कि दंडात्मक नीति बनाकर नागरिकों पर आर्थिक बोझ डालना। सरकार को इस दिशा में तुरंत सुधार करना चाहिए ताकि आम नागरिक को राहत मिल सके।
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