पानीपत जिला सचिवालय सभागार में सोमवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने बाल विवाह रोकथाम को लेकर सभी विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में उपायुक्त डॉ दहिया ने स्पष्ट कहा कि जिले के किसी भी गांव में बाल विवाह पाए जाने पर उस गांव के सरपंच को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया जाएगा।
कड़ी निगरानी, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य
उपायुक्त डॉ. दहिया ने कहा कि बाल विवाह को जड़ से खत्म करने के लिए गांव-स्तर से लेकर जिला-स्तर तक कड़ी निगरानी, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है। उपायुक्त ने कहा कि बाल विवाह की एक भी घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सूचना छिपाने या लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारी व जनप्रतिनिधि पर सख़्त कार्रवाई होगी। उपायुक्त ने कहा कि पुलिस बाल विवाह से जुड़े किसी भी मामले में तुरंत प्राथमिकी(एफ.आई.आर.) दर्ज कर बाल विवाह निषेध अधिकारी को सूचना दे। मामले में पेश किए गए बच्चे की आयु, मुक़दमे की प्रगति और दोषसिद्धि, निर्दोष संबंधित सभी जानकारी साझा की जाए।
गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाएँ
उपायुक्त डॉ. दहिया ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी विजय मलिक को निर्देश दिए गए कि सभी आशा कार्यकर्ताओं और ए.एन.एम. को बाल विवाह निषेध कानून की पूरी जानकारी देकर गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाएँ। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाल विवाह रोकथाम संबंधी नारे प्रदर्शित किए जाएँ। उपायुक्त डॉ. दहिया ने बताया कि यदि किसी मामले में नाबालिग के आयु संबंधी दस्तावेज उपलब्ध न हों तो तुरंत आयु का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए। उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा को निर्देश दिए गए कि सभी विद्यालय यह सुनिश्चित करें कि पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों (ड्रॉपआउट) का कारण पता लगाएँ और यदि बाल विवाह की आशंका हो तो तुरंत सूचना दें।
सभी सरपंच अपने गांव में होने वाले विवाह पर निगरानी रखें
उपायुक्त ने विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और विद्यालय प्रबंधन समिति तथा बाल संरक्षण समिति की नियमित बैठकें कराने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त डॉ. दहिया ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश शर्मा को विशेष रूप से निर्देश दिया गया कि सभी सरपंच अपने गांव में होने वाले विवाह पर निगरानी रखें और बाल विवाह की किसी भी घटना की सूचना अनिवार्य रूप से दें। उपायुक्त ने दोहराया कि गांव में बाल विवाह पाया गया तो सरपंच का निलंबन निश्चित है। उपायुक्त डॉ. दहिया ने समाज कल्याण विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग तथा बाल कल्याण समिति को निर्देश दिए गए कि वे बाल विवाह संबंधी किसी भी घटना की सूचना तुरंत दें और अपने स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक गांव-गांव विवाह सूची तैयार करें
उपायुक्त ने पोक्सो (बाल यौन अत्याचार संरक्षण अधिनियम) से जुड़े मामलों में पीडि़त बच्चों को आवश्यक सहयोग तथा सहयोगी कर्मी उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त डॉ दहिया ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक गांव-गांव विवाह सूची तैयार करें और किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तुरंत विभाग को दें। उपायुक्त डॉ. दहिया ने कहा कि बाल विवाह समाज के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालता है और इसे रोकना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उपायुक्त ने अधिकारियों से विभागों के बीच तालमेल व त्वरित सूचना प्रणाली मजबूत करने को कहा, ताकि जिले को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सके। इस मौके पर सीजेएम (डीएलएसए) वर्षा शर्मा, सीएमओ विजय मलिक, डीडीपीओ राजेश शर्मा, डीईओ राकेश बूरा, डीएस डब्ल्यू जापान सिंह,डीएसपी ज्योती, जिला बाल प्रोटेक्शन अधिकारी रजनी गुप्ता,डब्ल्यू सीडी सुरेश, सी डब्ल्यू सी किरण मलिक, अंजू त्यागी, विक्रम सिंह के अलावा कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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