प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति असाधारण लगाव रखने वाले रामचंद्र स्वामी आज क्षेत्र में स्वच्छता और समर्पण का प्रतीक बन चुके हैं। मोदी के नाम पर चलाए जा रहे उनके निरंतर सफाई अभियान ने लोगों में जागरूकता बढ़ाई है और कई ग्रामीण उनके प्रयासों से प्रभावित होकर इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। रामचंद्र स्वामी वर्षों से प्रतिदिन सफाई कार्य में जुटे रहते हैं। सड़क किनारे हो या सार्वजनिक स्थल वे हर दिन स्वयं सफाई करते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि उनका यह अनुशासन और निष्ठा अब पूरे इलाके की पहचान बन गया है। कस्बे के मुख्य चौक से लेकर देश के अलग अलग राज्यों के रेलवे स्टेशन हो या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर वह कस्बे में सफाई अभियान चलाते रामचंद्र स्वामी। सफाई वाले बाबा के नाम से मशहूर हैं।
पीएम मोदी से मिलने की बड़ी तमन्ना
हरियाणा के चरखी दादरी के कारी मोद गांव के रहने वाले 71 साल के रामचंद्र स्वामी प्रधानमंत्री मोदी के परम भक्त हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी को भगवान कृष्ण और खुद को गरीब सुदामा बताते हैं। रामचंद्र की पीएम मोदी में इतनी गहरी आस्था है कि वह अपने साथ हमेशा उनकी तस्वीर भी रखते हैं। रामचंद्र की पीएम मोदी से मिलने की बड़ी तमन्ना है। इसके लिए वह एक बार 170 किलोमीटर पैदल चलकर दिल्ली पहुंचे, लेकिन उनकी इच्छा अधूरी रह गई। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। अपना मजबूत इरादा जाहिर करते हुए रामचंद्र स्वामी ने कहा कि वह किसी की सिफारिश पर प्रधानमंत्री मोदी से नहीं मिलना चाहते हैं। अपने काम के बदौलत एक सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मिलेगा।
सफाई वाले बाबा के नाम से मशहूर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति असाधारण लगाव रखने वाले रामचंद्र स्वामी आज क्षेत्र में स्वच्छता और समर्पण का प्रतीक बन चुके हैं। मोदी के नाम पर चलाए जा रहे उनके निरंतर सफाई अभियान ने लोगों में जागरूकता बढ़ाई है और कई ग्रामीण उनके प्रयासों से प्रभावित होकर इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। रामचंद्र स्वामी वर्षों से प्रतिदिन सफाई कार्य में जुटे रहते हैं। सड़क किनारे हो या सार्वजनिक स्थल वे हर दिन स्वयं सफाई करते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि उनका यह अनुशासन और निष्ठा अब पूरे इलाके की पहचान बन गया है। कस्बे के मुख्य चौक से लेकर देश के अलग अलग राज्यों के रेलवे स्टेशन हो या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर वह कस्बे में सफाई अभियान चलाते रामचंद्र स्वामी। सफाई वाले बाबा के नाम से मशहूर हैं।
उनको कहने की जरूरत नहीं, जहां भी गंदगी दिखाई देती है तो वो सफाई में लग जाते
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रामचंद्र स्वामी नित्य सफाई व्यवस्था को ठीक करने में लगे रहते हैं। उनको कहने की जरूरत नहीं है वो बिना कहे ही जहां भी गंदगी दिखाई देती है तो वो सफाई में लग जाते हैं। लोगों का मानना है कि रामचंद्र स्वामी की कहानी यह साबित करती है कि एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है, बशर्ते उसके भीतर दृढ़ निष्ठा और सकारात्मक सोच हो। हमलों, विरोध और सरकारी उपेक्षा के बावजूद उनका समर्पण लोगों को प्रेरित करता रहता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकार को ऐसे महापुरुषों को प्रोत्साहन करना चाहिए और सरकारी सफारी कर्मचारी की नौकरी देकर सम्मानित करना चाहिए, ताकि उनके परिवार का पालन पोषण हो सके।
अब तक सरकार की ओर से न कोई पुरस्कार दिया गया है, न ही रोजगार
ग्रामीण क्षेत्र में उनके सफाई के प्रति समर्पण को देखते हुए सांसद धर्मवीर सिंह, विधायक उमेद पातुवास व पूर्व विधायक सुखविन्द्र मांढी भी उनके निवास पर पहुंचकर उनकी पहल की सराहना कर सम्मानित चुके हैं। इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से न कोई पुरस्कार दिया गया है, न ही रोजगार की किसी प्रकार की सहायता, जिस पर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ रही है। मोदी से मिलने के लिए खाटू श्याम से दिल्ली तक की पैदल यात्रा मोदी के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए रामचंद्र स्वामी कई बार प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश कर चुके हैं। वे खाटू श्याम मंदिर से लेकर दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास तक पैदल यात्रा कर चुके हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। रामचंद्र स्वामी की मन की इच्छा है कि एक बार प्रधानमंत्री से वो मिल सके और उनको किसी प्रकार का लालच नहीं है। वो जितनी जिंदगी बची है इसी प्रकार सफाई करते रहेंगे।
उनकी भक्ति कई बार उनके लिए खतरा बन गई
पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा संचालित स्वच्छता मिशन के हिमायती बनने के कारण खुले तौर पर व्यक्त की गई उनकी भक्ति कई बार उनके लिए खतरा बन गई। इसको लेकर उनको कई बार समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इसको लेकर लोहारू में तीन बार तो जींद में भी दो बार उन्हें हमलों का सामना करना पड़ा है। कई बार लोगों ने उनकी गाड़ी तक क्षतिग्रस्त कर दी, परंतु वे रुके नहीं। उनका हौसला कम नहीं हुआ है। रामचंद्र स्वामी लगातार अपने सफाई अभियान को पिछले 11 वर्षों से इसी प्रकार चला रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रामचंद्र स्वामी की निस्वार्थ सेवा को ध्यान में रखते हुए सरकार को उन्हें सम्मानित करना चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि उनको स्वच्छता अभियान से संबंधित जिम्मेदारी, सरकारी सम्मान और रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए।
तीन महीने नौ दिन का उपवास भी रखा
दरअसल रामचंद्र स्वामी एक ट्रक ड्राइवर थे और अपने काम के चलते अक्सर ट्रक लेकर गुजरात आते-जाते थे। गुजरात में विकास कार्यों से प्रभावित होकर रामचंद्र के मन में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आस्था जगी और जब 2014 के आम चुनाव के लिए भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया तो उन्हें खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने उनके प्रधानमंत्री बनने की कामना करते हुए तीन महीने नौ दिन का उपवास भी रखा। करोड़ों लोगोंं की तरह रामचंद्र की भी कामना पूरी हुई और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री निर्वाचित हो गए। इससे रामचंद्र का प्रधानमंत्री मोदी में अटूट आस्था बन गई, जो आज भी बनी हुई है।