वीर सावरकर पुरस्कार को लेकर चल रही चचार्ओं के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वीर सावरकर पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि उन्होंने यह पुरस्कार कल ही (मंगलवार) के दिन सुना और वे पुरस्कार समारोह में नहीं जाएंगे। बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए, थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस पुरस्कार के बारे में मंगलवार यानी 9 दिसंबर को ही मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से पता चला था,जब वह केरल में स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान करने गए थे।उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में कल ही सुना। मैं वहां नहीं जा रहा हूं। शशि थरूर ने साफ किया कि वह वी.डी. सावरकर के नाम पर दिया जाने वाला कोई भी पुरस्कार स्वीकार नहीं करेंगे और न ही इससे जुड़े किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना गैर जिम्मेदाराना हरकत
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने यह भी कहा कि मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना आयोजकों की ओर से गैर जिम्मेदाराना हरकत थी। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि आयोजकों ने उनकी सहमति या पूर्व सूचना के बिना उनके नाम की घोषणा की, जिसे उन्होंने एक "गैर-जिम्मेदाराना" कदम बताया। उन्हें पुरस्कार की प्रकृति, पृष्ठभूमि या इसे देने वाले संगठन के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी या विवरण नहीं दिया गया था। थरूर ने एक बयान में कहा कि जब उन्होंने इस बारे में सुना तो उन्होंने तुरंत स्पष्ट कर दिया कि वह न तो पुरस्कार से अवगत थे और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया था। उन्होंने यह भी दृढ़ता से कहा कि समारोह में भाग लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
पुरस्कार देने वाली संस्था ने किया बड़ा दावा
थरूर के बयान के बाद पुरस्कार देने वाली हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (एचआरडीएस) इंडिया के सचिव अजी कृष्णन ने एक टीवी चैनल को बताया कि कांग्रेस सांसद को इस मामले की जानकारी काफी पहले ही दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि एचआरडीएस इंडिया के प्रतिनिधियों और पुरस्कार जूरी के अध्यक्ष ने थरूर को आमंत्रित करने के लिए उनके आवास पर उनसे मुलाकात की थी और सांसद ने पुरस्कार के अन्य प्राप्तकतार्ओं की सूची मांगी थी। उन्होंने दावा करते हुए कहा, 'हमने उन्हें सूची दे दी थी। उन्होंने अभी तक हमें सूचित नहीं किया है कि वे कार्यक्रम में नहीं आएंगे। शायद वे डरे हुए हैं, क्योंकि कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना दिया है।
किसी भी कांग्रेस सदस्य को वीर सावरकर के नाम का कोई भी पुरस्कार नहीं लेना चाहिए
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म '' पर एक पोस्ट में कांग्रेस सांसद ने कहा, 'पुरस्कार की प्रकृति, इसे प्रदान करने वाले संगठन या किसी अन्य प्रासंगिक विवरण के बारे में स्पष्टीकरण के अभाव में, आज कार्यक्रम में मेरी उपस्थिति या पुरस्कार स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।' उन्होंने आगे कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि मंगलवार को स्थानीय निकाय चुनावों में वोट डालने के लिए केरल जाने पर उन्हें इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। मुरलीधरन ने पुरस्कार को कांग्रेस का अपमान बताया, दूसरी ओर कांग्रेस नेता के मुरलीधरन ने बुधवार को इस मामले में कहा कि किसी भी कांग्रेस सदस्य को चाहे वह सांसद शशि थरूर ही क्यों न हों वीर सावरकर के नाम का कोई भी पुरस्कार नहीं लेना चाहिए।