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The Haryana Story | कई सदियों पुराना है नए जिले 'हांसी का इतिहास', प्राचीन, मध्ययुगीन और आधुनिक इतिहास की परतें एक साथ मौजूद

कई सदियों पुराना है नए जिले 'हांसी का इतिहास', प्राचीन, मध्ययुगीन और आधुनिक इतिहास की परतें एक साथ मौजूद

हांसी सिर्फ़ एक प्रशासनिक इकाई नहीं है यह लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और औपनिवेशिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है

हरियाणा राज्य का गठन 1 नवंबर 1966 को हुआ था, हालांकि, इसका इतिहास बहुत प्राचीन, बहुस्तरीय और वैश्विक संबंधों से जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से, हरियाणा में जिलों का समय-समय पर पुनर्गठन किया गया है। इसी क्रम में, हाल ही में हांसी को हिसार जिले से अलग करके हरियाणा का 23वां जिला घोषित किया गया है। हांसी सिर्फ़ एक प्रशासनिक इकाई नहीं है यह लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और औपनिवेशिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। औपचारिक रूप से गठन 1 नवंबर 1966 को हरियाणा के नए राज्य के रूप औपचारिक रूप से अस्तित्व में आ जाने के बाद इसमें सीमित संख्या में जिले थे, हालांकि, प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से समय-समय पर नए जिले बनाए गए हैं। इसी क्रम में, हांसी को हाल ही में हिसार जिले से अलग करके हरियाणा का नया जिला घोषित किया गया है। हांसी जिला लंबी ऐतिहासिक परंपरा का एक जीता-जागता प्रतीक है, जहां प्राचीन, मध्ययुगीन और आधुनिक इतिहास की परतें एक साथ मौजूद हैं।

कर्नल जेम्स स्किनर का हांसी क्षेत्र से सीधा और विशेष संबंध था

यह ऐतिहासिक निरंतरता हरियाणा को भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक खास और जरूरी जगह देती है। इतिहासकारों के अनुसार औपनिवेशिक काल में हांसी प्रशासनिक और सैन्य गतिविधियों का केंद्र रहा है। कर्नल जेम्स स्किनर का हांसी क्षेत्र से सीधा और विशेष संबंध था। उनकी सैन्य, प्रशासनिक और व्यक्तिगत गतिविधियां काफी हद तक यहीं केंद्रित थीं। एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि उनकी दो भारतीय पत्नियों की कब्रें आज भी हांसी में मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र के साथ उनके गहरे सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को दर्शाती हैं। यह पहलू हमें औपनिवेशिक इतिहास को केवल शक्ति और युद्ध के संदर्भ में नहीं, बल्कि सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दृष्टिकोण से भी देखने की अनुमति देता है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में से एक ‘जेम्स स्किनर एस्टेट’ की मुहर है, जो 1811 ईस्वी की है, जिस पर यह शिलालेख है: ‘स्किनर एस्टेट-स्थापित 1811-इलाका हुरियानाह।’ यह मुहर इस बात का पक्का सबूत है कि ‘हरियाणा’ नाम न सिर्फ़ चलन में था, बल्कि औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता भी दी गई थी। 

हांसी का इतिहास हिसार से भी पुराना

यह हरियाणा की ऐतिहासिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता। अंग्रेजों के समय में हांसी जिला मुख्यालय रहा है। इतिहासकारों के अनुसार अठारहवीं सदी के अंतिम दशकों में, हरियाणा का इतिहास एक नए मोड़ पर पहुंचा, जब यह क्षेत्र वैश्विक शक्तियों से जुड़ी राजनीतिक और सैन्य गतिविधियों का केंद्र बन गया। इस अवधि के दौरान, आयरलैंड में जन्मे एक ब्रिटिश सैन्य साहसी जॉर्ज थॉमस ने खुद को हरियाणा के कुछ हिस्सों का स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया। इसके बाद, कर्नल जेम्स स्किनर के रूप में इस क्षेत्र के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण विदेशी व्यक्ति सामने आया। अंग्रेजों ने 1803 में जब हरियाणा पर कब्जा किया तो हांसी को प्रशासनिक मुख्यालय अर्थात जिला बनाया गया। हालांकि बाद में साल 1832 में हिसार को जिला बना दिया गया। इस लिहाज से हांसी का इतिहास हिसार से भी पुराना है। 

मुगलों ने इसको परगना नाम दिया

हांसी वर्ष 735 में बना था जबकि हिसार वर्ष 1354 में बना था। इसके अलावा इतिहासकार बताते हैं कि दिल्ली सल्तनत काल में जिले को अक्ता के नाम से पुकारा जाता था जबकि मुगलों ने इसको परगना नाम दिया और फिर जब अंग्रेज आए तो उन्होंने इसको प्रशासनिक केंद्र और फिर जिला नाम दिया। उन्होंने बताया कि बाबा फरीद जैसी हस्ती हांसी में रही, जो हिंदू- मुस्लिम एकता के प्रतीक थे और सिख धर्म के संस्थापन गुरु नानक भी इनको श्रद्धा से देखते थे। बता दें कि बाबा फरीक मूल रूप से पंजाबी मुस्लिम परिवार से थे और उनका जन्म 8 अप्रैल, 1188 को मुल्तान के समीप कोठेवाल गांव में हुआ था। उन्होंने गुरु ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तिया काकी से इस्लामिक सिद्धांत की शिक्षा ली और फिर वो हांसी आ गए।

हांसी एक प्राचीन नगर है, जिसे प्रथम और द्वितीय शताब्दी में कुषाणों का गढ़ माना जाता था

बताया जाता है कि ‘हरियाणा’ नाम का सबसे पहला ऐतिहासिक जिक्र दिल्ली में मिले एक बावड़ी के शिलालेख में मिलता है, जिस पर ‘हरियाणा’ शब्द खुदा हुआ है। यह सबूत राज्य के नाम की प्राचीनता को साफ तौर पर स्थापित करता है। इस तरह, ऋग्वेद साहित्य, दिल्ली का शिलालेख और जेम्स स्किनर की मुहर, ये तीनों मिलकर हरियाणा की ऐतिहासिक पहचान और प्राचीनता की गवाही देने वाले तीन महत्वपूर्ण स्रोत हैं। कुछ विशेषज्ञों की मुताबिक हांसी का इतिहास वास्तव में हिसार से कई सदियां पुराना है। जहां हिसार की स्थापना 14वीं शताब्दी में हुई थी, वहीं हांसी का अस्तित्व पहली शताब्दी से मिलता है। हांसी एक प्राचीन नगर है, जिसे प्रथम और द्वितीय शताब्दी में कुषाणों का गढ़ माना जाता था। 

हांसी को राज्य का 23वां जिला घोषित

कुछ इतिहासकार इसकी स्थापना 735 ईस्वी मानते हैं, जबकि हिसार की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने 1354 ईस्वी में की थी। हांसी का प्रसिद्ध 'असीगढ़ किला' (जिसे पृथ्वीराज चौहान का किला भी कहा जाता है) 1000 साल से भी अधिक पुराना है। पृथ्वीराज चौहान ने 12वीं शताब्दी में इसे एक मजबूत सैन्य अड्डे के रूप में विकसित किया था। हिसार की स्थापना से पहले हांसी ही इस क्षेत्र का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय था। अंग्रेजों के समय भी 1819 से 1832 तक हांसी जिला मुख्यालय रहा, जिसे बाद में 1832 में हिसार स्थानांतरित कर दिया गया। 1798 से 1801 के बीच आयरिश साहसी जॉर्ज थॉमस ने हांसी को अपनी स्वतंत्र रियासत की राजधानी बनाया था। बता दें कि हांसी के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए, हरियाणा सरकार ने दिसंबर 2025 में हांसी को राज्य का 23वां जिला घोषित किया है।

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