दिसंबर 2025 के अंत में रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें लगभग 80,000 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस संभावित रक्षा सौदे तहत रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 80,000 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) प्रदान की जा सकती है। इस बड़े रक्षा सौदे की मुख्य विशेषताओं की बात करें तो काउंसिल ने लगभग 40,000 करोड़ रुपये की लागत से दो और घातक कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा बनाया जाएगा।सेना के टैंक बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए T-90 टैंकों के लिए नए 'कॉकपिट' और अन्य प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इन सभी प्रस्तावों को 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' श्रेणी के तहत मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना है।
आपातकालीन खरीद को भी दी जा सकती है मंजूरी
गौरतलब है कि इस बैठक में एम्ब्रेयर-आधारित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग (AEW) सिस्टम की खरीद और स्वदेशी नेत्रा (NETRA) AEW सिस्टम के एकीकरण पर मुहर लग सकती है। आपातकालीन खरीद सेना की परिचालन तैयारियों को तुरंत मजबूत करने के लिए कई प्रमुख हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपातकालीन खरीद को भी मंजूरी दी जा सकती है। प्रस्तावों में नौसेना के लिए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स (LPDs) (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) और वायु सेना के लिए लंबी दूरी के लक्ष्य विनाश प्रणाली (Target Saturation/Destruction System) शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा टी-90 टैंकों का आधुनिकीकरण, नौसेना के लिए नए टग्स (Tugs), और वायु सेना के लिए फ्यूल मिशन सिमुलेटर जैसे प्रोजेक्ट्स भी चर्चा का हिस्सा हैं।
यह नया प्रस्ताव भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगा
बता दें कि यह बैठक 26 दिसंबर, 2025 को निर्धारित थी, लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार इसे सूत्रों के मुताबिक, अब यह अगले हफ्ते हो सकती है। बता दें कि इससे पहले, अक्टूबर 2025 में भी DAC ने 79,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, जिसमें नाग मिसाइल सिस्टम (NAMIS) और अन्य आधुनिक हथियारों की खरीद शामिल थी। 80,000 करोड़ रुपये का यह नया प्रस्ताव भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगा। सरल भाषा में कहें तो यह मीटिंग तय करेगी कि भारत आने वाले समय में कौन से आधुनिक हथियार और सैन्य उपकरण खरीदेगा। बता दें कि डीएसी सेना के लिए हथियार खरीदने की मंजूरी देने वाली सबसे बड़ी कमेटी है। इसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख (थल सेना, वायु सेना और नौसेना), चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और रक्षा सचिव शामिल होते हैं। जब तक डीएसी हरी झंडी नहीं देती, तब तक सेना कोई बड़ा हथियार नहीं खरीद सकती।
इस मीटिंग को साल 2025 की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जा रहा
वहीं, इस मीटिंग को साल 2025 की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से कई चीजों पर चर्चा होगी। भारत एम्ब्रेयर विमानों पर आधारित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। इसे सरल भाषा में आसमान में उड़ने वाला रडार कहते हैं जो दुश्मन के विमानों या मिसाइलों को बहुत दूर से ही पहचान लेता है। भारत के अपने नेत्रा रडार सिस्टम को और भी एडवांस बनाने और नए विमानों में फिट करने पर चर्चा होगी। कुछ हथियार ऐसे होते हैं जिनकी सेना को तुरंत जरूरत होती है। इस मीटिंग में ऐसी इमरजेंसी खरीद को भी मंजूरी मिल सकती है ताकि सेना की ताकत में कोई कमी न रहे।
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