loader
The Haryana Story | प्रदेश में बढ़ते नशे को लेकर सैलजा ने सरकार को घेरा, बताया आखिर युवा पीढ़ी के लिए नशा क्यों बन रहा सबसे बड़ा खतरा

प्रदेश में बढ़ते नशे को लेकर सैलजा ने सरकार को घेरा, बताया आखिर युवा पीढ़ी के लिए नशा क्यों बन रहा सबसे बड़ा खतरा

कहा- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से पांव पसार रहा है नशा, हरियाणा में बढ़ते नशे पर सरकार गंभीर कदम उठाए

सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा में लगातार बढ़ रहे नशे के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से ठोस और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। सांसद ने कहा कि नशा आज प्रदेश की युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है और इसे हल्के में लेना भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असंतुलन का परिणाम है। जब तक सरकार नशे के मूल कारणों पर काम नहीं करेगी, तब तक इस पर नियंत्रण संभव नहीं है।

बेरोजगारी नशे को बढ़ावा देने वाला सबसे बड़ा कारण

नशे को लेकर जो गठजोड़ बना हुआ है जो नशा तस्करों का पोषण कर रहे है सबसे पहले उन पर पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता के साथ प्रहार करना होगा। सांसद ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी नशे को बढ़ावा देने वाला सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। आज हरियाणा में दो लाख से अधिक सरकारी पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार उन्हें भरने के प्रति गंभीर नहीं है। पढ़ा-लिखा युवा वर्षों तक रोजगार की प्रतीक्षा करता है और निराशा में गलत रास्ते की ओर चला जाता है। 

खाली पड़े सरकारी पदों को शीघ्र भरा जाए ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके

सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि सबसे पहले खाली पड़े सरकारी पदों को शीघ्र भरा जाए ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके, बेरोजगारी की अवस्था में वह गलत राह पर जाने से बच सके। युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। नशा मुक्ति अभियानों को केवल औपचारिकता न बनाकर जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों, प्रशासन और राजनीतिक दलों को साथ लेकर अभियान चलाया जाए। 

केवल भाषणों और कागजी योजनाओं से नशे पर नियंत्रण संभव नहीं

कुमारी सैलजा ने स्पष्ट कहा कि केवल भाषणों और कागजी योजनाओं से नशे पर नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए ठोस नीति, इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास की आवश्यकता है। नशा को लेकर जो भी आंकड़े सामने आ रहे है वे चौंकाने वाले और गंभीर चिंता का विषय है, नशा करने वालों में 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। सरकार जिन गांवों और वार्डो को नशा मुक्त करने का दावा कर रही है वहां पर नशेडियों की संख्या ज्यादा है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, अंबाला और यमुनानगर नशे की चपेट में आए हुए है और सिरसा सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है और नशे से सबसे ज्यादा मौतें भी सिरसा जिला में हुई है। सांसद ने सरकार से अपील की कि वह प्रदेश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तुरंत ठोस कदम उठाए, ताकि हरियाणा को नशे की चपेट से बाहर निकाला जा सके।

Join The Conversation Opens in a new tab
×