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The Haryana Story | खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत के बाद नहीं जागी सरकार, प्रदेश के 67% स्कूलों के खेल मैदान बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं

खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत के बाद नहीं जागी सरकार, प्रदेश के 67% स्कूलों के खेल मैदान बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं

विभागीय रिपोर्ट ने सरकार के सभी दावों की खोली पोल, केवल 10 प्रतिशत मैदान ही सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि रोहतक में दो होनहार खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत के बाद भी हरियाणा सरकार की नींद नहीं खुली है। उस समय सरकार ने केवल औपचारिकता निभाते हुए एक कमेटी गठित करने और पूरे प्रदेश के स्कूलों के खेल मैदानों की जांच कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब जो विभागीय रिपोर्ट सामने आई है, उसने सरकार के उन सभी दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 67 प्रतिशत स्कूलों के खेल मैदान बच्चों के लिए असुरक्षित हैं और केवल 10 प्रतिशत मैदान ही सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं। यह स्थिति अत्यंत गंभीर और शर्मनाक है।

आज भी हजारों बच्चे उन्हीं खतरनाक मैदानों में खेलने को मजबूर

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि रोहतक की घटना के बाद अगर सरकार सचमुच गंभीर होती तो आज यह हालात सामने नहीं आते। रिपोर्ट साफ बता रही है कि अधिकांश स्कूलों में जर्जर पोल लगे हुए हैं, खेल उपकरण टूटे हुए हैं, मैदान समतल नहीं हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतज़ाम न के बराबर हैं। यह लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। सांसद ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार को एक नहीं, दो बच्चों की मौत के बाद भी होश नहीं आया। सरकार ने जांच की बात तो कही, लेकिन न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ही जमीनी स्तर पर कोई सुधार किया गया। आज भी हजारों बच्चे उन्हीं खतरनाक मैदानों में खेलने को मजबूर हैं, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील हो चुकी है। यदि समय रहते खेल मैदानों की मरम्मत, उपकरणों की जांच और सुरक्षा मानकों का पालन कराया जाता तो रोहतक जैसी दुखद घटना को रोका जा सकता था। सरकार की लापरवाही के कारण मासूम बच्चों की जान जा रही है, और यह किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है।

सांसद ने मांग की कि राज्य के सभी सरकारी व निजी स्कूलों के खेल मैदानों की तुरंत दोबारा जांच कराई जाए, जर्जर उपकरणों को हटाया जाए, सुरक्षा मानकों को अनिवार्य किया जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही पीड़ित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा दिया जाए। सैलजा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक पूरी ताकत से उठाएगी, क्योंकि बच्चों की जान से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता।

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