करनाल के सरकारी अस्पताल में बुधवार सुबह से सर्वर ठप होने के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल का कंप्यूटराइज्ड सिस्टम बंद होने से पर्ची बनाने का काम पूरी तरह ठप रहा, जिससे इलाज प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालात यह रहे कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार मरीजों को कड़ाके की ठंड में घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। मरीजों का कहना है कि सुबह से अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा रही, लेकिन सर्वर न चलने के कारण पर्ची नहीं बन सकी। बिना पर्ची के डॉक्टरों को दिखाना संभव नहीं हो पाया। कई मरीज दूर-दराज के गांवों से इलाज के लिए पहुंचे थे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
बाहर खड़े मरीजों की परेशानी को नजरअंदाज किया जा रहा था
मरीज गौरव ने बताया कि वह सुबह करीब 8 बजे मेडिकल करवाने के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दोपहर तक उनकी पर्ची नहीं काटी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने समस्या का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया और मरीजों को एक लाइन से दूसरी लाइन में भेजकर केवल चक्कर लगवाए गए। बाद में महिलाओं की अलग लाइन लगाई गई, जहां मैन्युअल पर्ची काटी जा रही थी। वहीं, महिला मरीज रूपी ने बताया कि वह बच्चों के साथ पर्ची बनवाने के लिए आई थीं, लेकिन सुबह से लाइन में खड़े रहने के बावजूद कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि अंदर दूसरे गेट से कुछ लोगों की पर्ची बन रही थी, जबकि बाहर खड़े मरीजों की परेशानी को नजरअंदाज किया जा रहा था।
बच्चों के साथ घंटों लाइन में खड़े रहना बेहद मुश्किल हो गया
ठंड के मौसम में बच्चों के साथ घंटों लाइन में खड़े रहना बेहद मुश्किल हो गया। एक बुजुर्ग मरीज ने बताया कि उन्हें कुत्ते ने काट लिया था और खड़ा होना भी मुश्किल था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुबह से लाइन में खड़ा रहना पड़ा और उनकी पर्ची नहीं बन सकी। इस मामले में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सुबह से तकनीकी खराबी के कारण सर्वर काम नहीं कर रहे थे, जिसके चलते पर्ची नहीं कट सकी। सिविल अस्पताल करनाल के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि जैसे ही समस्या सामने आई, तुरंत इंजीनियर को सूचित कर दिया गया और हेड क्वार्टर पंचकूला को भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि करीब दो घंटे तक कंप्यूटराइज्ड पर्ची नहीं बन पाई, जिसके बाद मरीजों की परेशानी को देखते हुए पीएमओ के निर्देश पर कुछ समय के लिए मैन्युअल पर्ची काटने के आदेश दिए गए।
भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें
डॉ. गोयल ने कहा कि सिस्टम को दोपहर के आसपास दोबारा शुरू करने का प्रयास किया गया, लेकिन सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण सर्वर दोबारा चालू नहीं हो सका। इंजीनियर समस्या को ठीक करने में जुटे हुए हैं और उम्मीद है कि वीरवार सुबह तक सिस्टम पूरी तरह सुचारू हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के बिना मरीजों का रिकॉर्ड रखना संभव नहीं होता, इसी कारण शुरुआत में मैन्युअल पर्ची से बचा गया, लेकिन मरीजों की परेशानी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। मरीजों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि तकनीकी खामियों का खामियाजा आम जनता को न भुगतना पड़े।