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The Haryana Story | हुड्डा ने भाजपा की औद्योगिक नीतियों की कड़े शब्दों में की आलोचना, बोले- उद्योग पलायन को मजबूर

हुड्डा ने भाजपा की औद्योगिक नीतियों की कड़े शब्दों में की आलोचना, बोले- उद्योग पलायन को मजबूर

RBI और ASI के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2018-19 से अब तक हरियाणा में 1,446 फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी हैं या दूसरे राज्यों में पलायन कर गई

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में (जनवरी 2026 में) भाजपा सरकार की औद्योगिक नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की है। हुड्डा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2018-19 से अब तक हरियाणा में 1,446 फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी हैं या दूसरे राज्यों में पलायन कर गई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र में 12.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यहाँ का प्लाईवुड उद्योग उत्तर प्रदेश की ओर पलायन कर रहा है। हुड्डा के अनुसार, 2017 में यहाँ 380 इकाइयां थीं, जो अब घटकर केवल 160 रह गई हैं।

औद्योगिक सुविधाओं की कमी पलायन का मुख्य कारण 

पिछले तीन वर्षों में 100 से अधिक राइस मिलें हरियाणा से मध्य प्रदेश स्थानांतरित हो गई हैं, जिससे राज्य को सालाना 100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। पंचकूला के उद्योग हिमाचल प्रदेश (बद्दी) की ओर और गुरुग्राम-फरीदाबाद के उद्योग नोएडा और गाजियाबाद की ओर जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा सरकार द्वारा बिजली दरों में वृद्धि, बाजार शुल्क  में कमी न करना, और औद्योगिक सुविधाओं की कमी को पलायन का मुख्य कारण बताया। हुड्डा ने चेतावनी दी कि इस पलायन के कारण हरियाणा बेरोजगारी में देश में अव्वल बन गया है और राज्य पर कर्ज बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। हुड्डा ने यह भी कहा कि जहां उनकी सरकार के दौरान 6 नए (औद्योगिक मॉडल टाउनशिप) बनाए गए थे, वहीं भाजपा के 11 साल के शासन में एक भी नया आईएमटी स्थापित नहीं किया गया।

भाजपा शासनकाल में औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति बेहद चिंताजनक

उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। भाजपा की गलत नीतियों के चलते हरियाणा से लगातार उद्योग पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण के डेटा के आधार पर यह जानकारी दी है। ताज़ा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 से अब तक हरियाणा में 1446 फैक्ट्रियां या तो बंद हो गई हैं या पलायन कर गई हैं। जिसके कारण हरियाणा में बेरोजगारी, नशा, अपराध और पलायन बढ़ रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पिछले 5 सालों में हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र में 12.2% की गिरावट आई है। क्योंकि, सत्ता में बैठी बीजेपी इस ओर ध्यान ही नहीं दे रही। जबकि, कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश में 6 नई आईएमटी ( एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र) बनवाए थे।

जमीनी हकीकत से कोसों दूर

साथ ही मारुति, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, रिलाइंस, होंडा, आईओसी, पैनासोनिक, योकोहामा, डेंसो जैसे बड़े-बड़े उद्योग प्रदेश में स्थापित कराए। कांग्रेस सरकार ने ही रेल कोच फैक्ट्री और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी मंजूर करवाया था, ताकि सम्पूर्ण इलाके को तेज औद्योगिक विकास का फायदा मिले और स्थानीय हरियाणा वासियों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें। लेकिन बीजेपी सरकार की बदनीयत के चलते ये दोनों परियोजनाएं एक-एक करके हरियाणा के बाहर भेज दी गई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट और आत्ममुग्ध प्रचार पर केंद्रित है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। 

हरियाणा की आर्थिक स्थिति चिंताजनक

आज अर्थशास्त्रियों और बुद्धिजीवियों का भी बीजेपी सरकार से विश्वास उठ चुका है क्योंकि हरियाणा की आर्थिक स्थिति चिंताजनक है। 1966 से 2014 तक प्रदेश का कुल कर्ज 60 हजार करोड़ था, जो अब 5 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है। नीति आयोग के फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में हरियाणा 18 राज्यों में 14वें स्थान पर है। 31% से अधिक Debt-to-GSDP  अनुपात बताता है कि प्रदेश कर्ज के गहरे जाल में फंस चुका है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 3 साल में भ्रष्टाचार के मामले 187% बढ़े हैं और हरियाणा भ्रष्टाचार में 6वें नंबर पर पहुंच गया है। तमाम रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीजेपी हरेक मोर्चे पर बुरी तरह विफल साबित हुई है।

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