भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप शिल्पकारों के हुनर को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए सूरजकुंड मेले का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से कारीगर अब केवल मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष अपना हस्तनिर्मित सामान विश्वभर में बेच सकेंगे। पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण शनिवार को सूरजकुंड मेला परिसर के कन्वेंशन हॉल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर निदेशक पार्थ गुप्ता, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक वर्षा खांगवाल मौजूद रहें। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे पारंपरिक शिल्पकारों के लिए एक ग्लोबल लॉन्च पैड है।
हमारे ग्रामीण कारीगरों की पहुंच सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक होगी
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के आने से हमारे ग्रामीण कारीगरों की पहुंच सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक होगी। उन्होंने पर्यटकों से आह्वान किया कि वे 'वोकल फॉर लोकल' के संदेश को सार्थक करें और शिल्पकारों द्वारा बनाए गए उत्पादों की खरीदारी अवश्य करें। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निदेर्शानुसार, मेला अथॉरिटी का लक्ष्य मेले को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना और केवल हस्तनिर्मित उत्पादों को ही बढ़ावा देना है। डॉ. श्रीवत्स कृष्ण ने कहा कि शिल्पकारों और पर्यटकों के उत्साह को देखते हुए मेले की अवधि को वर्तमान दो सप्ताह से बढ़ाकर चार सप्ताह करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्रीय पर्यटन मंत्री के निदेर्शानुसार, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकारों को मेले में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। ताकि उनके हुनर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया जा सकें।
इस वर्ष मेले के बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया
आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस वर्ष मेले के बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। कच्ची हटों को पक्का किया गया है और सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। इसके साथ ही मेले में साज सजावट सहित सभी प्रबंध सुनिश्चित किए गए है। उन्होंने बताया कि थीम राज्य' और 'थीम देश' के चयन की प्रक्रिया जुलाई से ही शुरू हो जाती है, जिसे रोटेशन के आधार पर तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि पर्यटक मेले की टिकट काउंटर के साथ-साथ ऑनलाइन भी खरीद सकेंगे।