सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि पिछले एक दशक में देश की अर्थव्यवस्था को विकास के नाम पर कर्ज़ के सहारे चलाया गया है। संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि 31 मार्च 2014 को केंद्र सरकार पर 58.6 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2024-25 में बढक़र 185.95 लाख करोड़ हो गया है। सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि पिछले एक दशक में देश की अर्थव्यवस्था को विकास के नाम पर कर्ज़ के सहारे चलाया गया है।
देश की वित्तीय सेहत पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह
संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि 31 मार्च 2014 को केंद्र सरकार पर 58.6 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2024-25 में बढक़र 185.95 लाख करोड़ हो गया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि केवल 10 वर्षों में 127 लाख करोड़ से अधिक का नया कर्ज जोड़ दिया गया। यह वृद्धि सामान्य नहीं, बल्कि देश की वित्तीय सेहत पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह है। सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत यह है कि देश को कर्ज़ के बोझ तले दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार से इस पर जवाब मांगा जाता है तो कहा जाता है कि कर्ज़ का जीडीपी अनुपात नियंत्रण में है, लेकिन आम जनता यह जानना चाहती है कि यदि इतनी भारी उधारी ही अच्छी अर्थव्यवस्था का पैमाना है, तो फिर किसी भी घाटे में चल रही कंपनी को सफल कहा जा सकता है।
केंद्र सरकार ही नहीं, हरियाणा की वित्तीय स्थिति भी बेहद चिंताजनक
कुमारी सैलजा ने कहा कि केवल केंद्र सरकार ही नहीं, हरियाणा की वित्तीय स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। राज्य में बुजुर्गों की पेंशन में कटौती की जा रही है, ‘लाडो लक्ष्मी’ जैसी योजनाओं को विभाजित किया जा रहा है, और किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पा रहा। यह दर्शाता है कि सरकार के पास लोकहित योजनाओं को चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का दावा करने वाली भाजपा सरकार असल में डबल कर्ज़ की सरकार बन चुकी है जहां विकास नहीं, बल्कि उधार के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि झूठे नारे और विज्ञापन भले कुछ समय के लिए भ्रम पैदा कर दें, लेकिन सरकारी आंकड़े सच्चाई बयां करते हैं। देश और हरियाणा की जनता इस वित्तीय कुप्रबंधन का जवाब आने वाले समय में जरूर देगी।
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