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The Haryana Story | हरियाणा में 'निर्दलीय उम्मीदवार' की एंट्री से दिलचस्प हुआ राज्यसभा चुनाव

हरियाणा में 'निर्दलीय उम्मीदवार' की एंट्री से दिलचस्प हुआ राज्यसभा चुनाव

इस चुनाव में साम-दाम-दंड-भेद का खेल चला, तो किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता

हरियाणा से राज्यसभा की रिक्त होने जा रही दो सीटों को भरने के लिए भाजपा ने पिछली 17वीं लोकसभा में प्रदेश की करनाल संसदीय सीट से पार्टी के पूर्व सांसद रह चुके संजय भाटिया को जबकि कांग्रेस पार्टी ने एससी से सम्बंधित और हरियाणा सिविल सचिवालय (haryana civil secretariat) से group B administration officer की post से retired कर्मवीर सिंह बौद्ध को पार्टी उम्मीदवार घोषित किया है। भाटिया और कर्मवीर दोनों ने 5 मार्च को अपना-अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

एक-एक उम्मीदवार ही चुनावी मैदान में रहता, तो मतदान की कोई आवश्यकता ही नहीं

खैर ये चुनाव और भी दिलचस्प होने जा रहा है, क्योंकि जब इन दोनों के नॉमिनेशन के बाद भाजपा के उप प्रदेश अध्यक्ष सतीश नांदल ने भी निर्दलीय के तौर पर नॉमिनेशन दाखिल कर दिया। गौरतलब है कि अगर भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों द्वारा हरियाणा से राज्यसभा की रिक्त होने जा रही दो राज्यसभा सीटों के लिए उतारा गया एक-एक उम्मीदवार ही चुनावी मैदान में रहता, तो मतदान की कोई आवश्यकता ही नहीं होती। Section 53 of the Representation of the People Act, 1951(2) के मुताबिक अगर किसी चुनाव में नॉमिनेशन दाखिल करने वाले उम्मीदवार की संख्या उस चुनाव द्वारा भरी जाने वाली vacant seats के बराबर हो, तो रिटर्निंग (निर्वाचन) अधिकारी उन सभी नामांकन भरने वाले उम्मीदवार, बशर्ते उनके नामांकन जांच में सही पाए गए हों, को सीधे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर देता है।

शिवालय कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सतीश नांदल

बता दें कि सतीश नांदल शिवालय कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। उन्होंने 1985 में वैश्य तकनीकी संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। वर्ष 2019 में दाखिल शपथपत्र के अनुसार उन्होंने अपनी चल संपत्ति करीब 11.74 करोड़ रुपये बताई थी, जबकि परिवार की कुल चल संपत्ति करीब 15 करोड़ रुपये दर्शाई गई थी। इसके अलावा उनके नाम करीब 5 करोड़ और परिवार के नाम करीब 15 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति बताई गई थी। कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध हरियाणा के रोहतक जिले के निवासी है। वे हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब चार साल पहले प्रशासनिक अधिकारी (एडीओ) पद से सेवानिवृत्त हुए थे। कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस किसी गुट का नेता नहीं माना जाता। इसलिए उन्हें संतुलित और सर्वस्वीकार्य चेहरा माना जा रहा है। वे पार्टी के संविधान बचाओ अभियान में सक्रिय रहे हैं और जमीनी स्तर पर कांग्रेस के कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं। 

जीत के लिए 31 विधायक होने आवश्यक

बता दें कि हरियाणा विधानसभा की 90 सदस्य संख्या के आधार पर राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए 31 विधायक होने आवश्यक है। कांग्रेस के पास present में 31 से 6 अधिक मतलब 37 विधायक है, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर कर्मवीर की जीत में कोई अवरोध तो नहीं लगता, लेकिन अगर आगामी कुछ दिनों में इस चुनाव में साम-दाम-दंड-भेद का खेल चला, तो किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा के पास 48 विधायक है, अर्थात 31 पहली प्राथमिकता के वोटों के बाद उसके पास 17 सरप्लस वोट हैं, तीन निर्दलीय भी भाजपा का समर्थन कर रहे हैं जबकि दो इनेलो विधायक भी नांदल का समर्थन कर सकते हैं चूंकि भाजपा में जाने से पहले नांदल इनेलो के ही वरिष्ठ नेता थे। 

नवनिर्वाचित उम्मीदवार का छ: वर्ष कार्यकाल 10 अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल, 2032 तक होगा

इस प्रकार अगले 11 दिनों में कुछ भी हो सकता है। वर्तमान में हरियाणा से राज्यसभा की कुल पांच सीटों में से भाजपा के चार जबकि एक निर्दलीय सांसद है। भाजपा के दो सांसदो रामचन्द्र जांगड़ा और किरण चौधरी का कार्यकाल (Tenure) अगले महीने 9 अप्रैल 2026 को पूरा हो जाएगा, भाजपा सांसद रेखा शर्मा का कार्यकाल अगस्त, 2028 तक है। भाजपा सांसद सुभाष बराला का कार्यकाल अप्रैल, 2030 तक है। हरियाणा से एकमात्र निर्दलीय राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा का कार्यकाल अगस्त, 2028 तक है। आगामी चुनाव में नवनिर्वाचित उम्मीदवार का छ: वर्ष कार्यकाल 10 अप्रैल 2026 से लेकर 9 अप्रैल, 2032 तक होगा।

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