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The Haryana Story | राज्य की वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग नीति-2024 के तहत कई महत्वपूर्ण योजनाओं को हरी झंडी

राज्य की वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग नीति-2024 के तहत कई महत्वपूर्ण योजनाओं को हरी झंडी

आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि की खरीद या लीज पर स्टैंप ड्यूटी की प्रतिपूर्ति का प्रावधान, युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में 13 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में हुई समीक्षा बैठक में राज्य की वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग नीति-2024 के तहत कई महत्वपूर्ण प्रोत्साहन योजनाओं को हरी झंडी दी गई है। पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग इकाइयों को अब 'उद्योग' का दर्जा दिया जाएगा, जिससे वे सरकारी वित्तीय सहायता योजनाओं के पात्र होंगे। नई इकाइयाँ स्थापित करने या मौजूदा इकाइयों के विस्तार पर निर्धारित दरों के अनुसार पूंजी निवेश पर सब्सिडी दी जाएगी। पात्र इकाइयों को उनके द्वारा जमा किए गए SGST (State GST) के एक हिस्से की प्रतिपूर्ति (reimbursement) की जाएगी, विशेष रूप से पिछड़े क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए।

इको-पार्क और रीसाइक्लिंग पार्क विकसित करने के लिए परियोजना लागत (भूमि को छोड़कर) का एक हिस्सा वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान किया जाएगा। आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि की खरीद या लीज पर स्टैंप ड्यूटी की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे और सरकारी ITI व पॉलिटेक्निक संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इस नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से पुराने वाहनों का निपटान करना और नीति अवधि के दौरान 85% रीसाइक्लिंग स्तर हासिल करना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि इन योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करें ताकि हरियाणा को देश का प्रमुख रीसाइक्लिंग हब बनाया जा सके। बैठक में इस नीति के माध्यम से राज्य में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग तथा रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर जोर दिया गया। इस बैठक में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस नीति के तहत पंजीकृत व्हीकल स्क्रैपिंग एवं रीसाइक्लिंग इकाइयों को उद्योग का दर्जा देते हुए कई प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

इसके अंतर्गत कैपिटल सब्सिडी स्कीम के माध्यम से नई औद्योगिक इकाइयों तथा विस्तार करने वाली इकाइयों को पूंजीगत निवेश पर निर्धारित प्रतिशत के अनुसार सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे उद्योग स्थापित करने की लागत कम होगी और राज्य में अधिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि नेट एस.जी.एस.टी. रीइम्बर्समेंट स्कीम के तहत पात्र औद्योगिक इकाइयों को राज्य जीएसटी के रूप में जमा की गई राशि का निर्धारित हिस्सा वापस किया जाएगा। इससे उद्योगों को आर्थिक राहत मिलेगी और विशेष रूप से पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त पार्क डेवलपर्स स्कीम के माध्यम से इको पार्क और रीसाइक्लिंग पार्क के विकास के लिए परियोजना लागत (भूमि को छोड़कर) का एक निर्धारित हिस्सा वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान किया जाएगा।

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