दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक, 2026 को लेकर राजनीतिक पारा गरमाया हुआ है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस विधेयक को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। संसद में और मीडिया से चर्चा के दौरान दीपेंद्र हुड्डा का आरोप है कि यह विधेयक CRPF, BSF, ITBP, SSB और CISF के जवानों और अधिकारियों की करियर प्रगति में बड़ी बाधा बनेगा।
मोदी सरकार पर तीखा हमला
दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक, 2026 को लेकर राजनीतिक पारा गरमाया हुआ है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस विधेयक को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। संसद में और मीडिया से चर्चा के दौरान दीपेंद्र हुड्डा का आरोप है कि यह विधेयक CRPF, BSF, ITBP, SSB और CISF के जवानों और अधिकारियों की करियर प्रगति में बड़ी बाधा बनेगा।
संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा और गृह मंत्री गायब !!
उन्होंने दावा किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों को बेअसर करने की कोशिश कर रही है, जिनमें CAPF अधिकारियों के पदोन्नति के अवसरों को सुधारने की बात कही गई थी। दीपेंद्र हुड्डा ने इस बात पर कड़ा एतराज जताया कि इतने महत्वपूर्ण संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री सदन में उपस्थित नहीं थे। कांग्रेस की मांग है कि OGAS (Organized Group A Services) को पूरी तरह लागू किया जाए और 2019 में कैबिनेट द्वारा मंजूर NFFU (Non Functional Financial Upgradation) का लाभ जवानों को दिया जाए।
शीर्ष पदों पर बाहरी अधिकारियों (IPS) को थोपना गलत
वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और वीडियो बयानों के जरिए कहा कि शीर्ष पदों पर बाहरी अधिकारियों (IPS) को थोपना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि जिन अधिकारियों ने जमीन पर वर्षों सेवा की है, नेतृत्व का अधिकार उन्हीं का होना चाहिए। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि यदि कांग्रेस की सरकार आती है, तो इस "भेदभावपूर्ण" कानून को तुरंत निरस्त (Repeal) कर दिया जाएगा। चर्चा के दौरान उन्होंने CRPF के घायल असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण दिया, जिन्होंने देश सेवा में अपना पैर खो दिया, लेकिन उन्हें उचित पदोन्नति नहीं मिली।
विधेयक का मुख्य विवाद क्या है?
विवाद की मुख्य जड़ IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) है। इस विधेयक के अनुसार महानिरीक्षक (IG) के 50% पद और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे। विशेष महानिदेशक (SDG) और महानिदेशक (DG) के सभी पद केवल IPS अधिकारियों द्वारा भरे जाएंगे। CAPF के कैडर अधिकारियों का तर्क है कि इससे उनके शीर्ष पदों पर पहुँचने के रास्ते बंद हो जाते हैं। विपक्ष के वॉकआउट के बावजूद, यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो चुका है और अब लोकसभा में चर्चा के केंद्र में है।
related
पानीपत के 35 गांवों की बदलेगी सूरत, 'मास्टर प्लान' तैयार, जानिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का 'मिशन विलेज'
दुष्यंत ने सैनी सरकार पर लगाए 'फिजूलखर्ची' के आरोप, बोले - करोड़ों का हेलीकॉप्टर बना 'सफेद हाथी', जनता के टैक्स की बर्बादी
अहीरवाल की 'सियासी जंग' तेज़: राव नरवीर ने नायब सैनी को दिया 'मास्टरस्ट्रोक' सुझाव, राव इंद्रजीत पर साधा कड़ा निशाना
Latest stories
CISF की जांबाज खिलाड़ी ने चीन में गाड़ा जीत का झंडा, रितु श्योराण की कप्तानी में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता गोल्ड
पानीपत के 35 गांवों की बदलेगी सूरत, 'मास्टर प्लान' तैयार, जानिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का 'मिशन विलेज'
फिरोजपुर झिरका में सीवर की जहरीली गैस ने छीनी दो मजदूरों की जिंदगी, ठेकेदार फरार, जिम्मेदार कौन?