हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल एक बार फिर अपनी जड़ों की ओर लौटते हुए बेहद भावुक नजर आए। अवसर था अपनी जन्मभूमि 'निंदाना' की पावन रज (मिट्टी) को नमन करने का। हरियाणा कला परिषद के निदेशक और मुख्यमंत्री के ओएसडी गजेंद्र फोगाट ने जब केंद्रीय मंत्री को उनके पैतृक गांव निंदाना की मिट्टी भेंट की, तो मनोहर लाल ने उसे श्रद्धा पूर्वक अपने माथे से लगा लिया।
यादों के झरोखे में मनोहर लाल: "यहीं बीता बचपन"
मिट्टी को माथे से लगाते हुए मनोहर लाल की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, "मैं अपनी जन्मभूमि निंदाना को कोटि-कोटि नमन करता हूँ। यह केवल मिट्टी नहीं, बल्कि मेरे लिए एक पवित्र शक्ति है। इसी माटी में खेलकर मैं बड़ा हुआ और यहीं से मुझे संस्कार, संघर्ष और निस्वार्थ समाज सेवा की प्रेरणा मिली।"उन्होंने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि गांव-देहात की सरलता और सहजता आज भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है, जिसका श्रेय इसी माटी को जाता है।
इतिहास में पहली बार: जीवित व्यक्तित्व पर 'सांग' का मंचन
इस विशेष अवसर पर गजेंद्र फोगाट ने केंद्रीय मंत्री को एक ऐतिहासिक जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा की लोक संस्कृति के इतिहास में पहली बार किसी जीवित व्यक्तित्व के जीवन संघर्ष पर 'सांग' (स्वांग) प्रस्तुत किया गया है।हरियाणा कला परिषद के कलाकारों—धर्मेंद्र सांगी, नरेन, सोनू कुंडू और प्रदीप की टीम ने 'सांग मनोहर लाल' की प्रस्तुति दी। इस सांग के माध्यम से मनोहर लाल के बचपन, उनके शुरुआती संघर्षों और मुख्यमंत्री के रूप में उनके द्वारा किए गए जनहित के कार्यों को लोक कला के जरिए जनता के बीच जीवंत किया गया।
युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक
गजेंद्र फोगाट ने कहा कि निंदाना के ग्रामीण अपने लाडले नेता को अपना गौरव मानते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी अपनी जन्मभूमि के प्रति ऐसा समर्पण और सादगी युवाओं के लिए एक अनुकरणीय संदेश है। फोगाट के अनुसार, मनोहर लाल का अपनी जड़ों से यह जुड़ाव दर्शाता है कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई पर पहुँच जाए, उसे अपनी माटी और संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए।
मनोहर लाल का जन्म रोहतक की महम तहसील के निंदाना गांव में हुआ था
बता दें कि मनोहर लाल हाल ही में अपने पैतृक गाँव में निर्माणाधीन लाइब्रेरी का निरीक्षण करने भी पहुंचे थे। यहाँ उन्होंने निर्धारित समय सीमा में कार्य को पूर्ण करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि बनियानी उनका पुश्तैनी गांव है, जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया और शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपना पैतृक घर यहाँ की पंचायत को ई-लाइब्रेरी (Maa Shanti Devi Library) के लिए दान कर दिया है। वहीं कुछ स्रोतों के अनुसार उनका जन्म रोहतक की महम तहसील के निंदाना गांव में हुआ था, लेकिन उनके परिजन विभाजन (1947) के बाद बनियानी में आकर बस गए थे, जहां उनका पैतृक आवास है।
related
पानीपत के 35 गांवों की बदलेगी सूरत, 'मास्टर प्लान' तैयार, जानिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का 'मिशन विलेज'
दुष्यंत ने सैनी सरकार पर लगाए 'फिजूलखर्ची' के आरोप, बोले - करोड़ों का हेलीकॉप्टर बना 'सफेद हाथी', जनता के टैक्स की बर्बादी
अहीरवाल की 'सियासी जंग' तेज़: राव नरवीर ने नायब सैनी को दिया 'मास्टरस्ट्रोक' सुझाव, राव इंद्रजीत पर साधा कड़ा निशाना
Latest stories
CISF की जांबाज खिलाड़ी ने चीन में गाड़ा जीत का झंडा, रितु श्योराण की कप्तानी में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता गोल्ड
पानीपत के 35 गांवों की बदलेगी सूरत, 'मास्टर प्लान' तैयार, जानिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का 'मिशन विलेज'
फिरोजपुर झिरका में सीवर की जहरीली गैस ने छीनी दो मजदूरों की जिंदगी, ठेकेदार फरार, जिम्मेदार कौन?