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The Haryana Story | सरकारी जमीन का फर्जी 'फसल पंजीकरण' कराकर घोटाला, डीसी ने दो सरपंचों को किया सस्पेंड-

सरकारी जमीन का फर्जी 'फसल पंजीकरण' कराकर घोटाला, डीसी ने दो सरपंचों को किया सस्पेंड-

श्मशान, स्कूल और गऊचरांद की जमीन पर 'उगा' दी फसल

हरियाणा सरकार के 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल में सेंध लगाकर सरकारी जमीन पर आर्थिक लाभ कमाने के मामले में करनाल जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त डीसी उत्तम सिंह ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते जिले के दो गांवों अमूपुर और सांभली के सरपंचों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

श्मशान, स्कूल और गऊचरांद की जमीन पर 'उगा' दी फसल

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इन सरपंचों पर आरोप है कि उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल, श्मशान घाट, गऊचरांद (गायों के चरने की भूमि) और बंजर जमीन को भी पोर्टल पर फर्जी तरीके से पंजीकृत करवा दिया। रिकॉर्ड में इन गैर-मुमकिन जमीनों पर फसल खड़ी दिखाई गई, ताकि सरकार से मिलने वाली सब्सिडी या फसल बिक्री का लाभ उठाया जा सके।

जांच में परत-दर-परत खुला फर्जीवाड़ा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब प्रशासन ने इसकी गहनता से जांच की, तो कई गड़बड़ियां पाई गईं, पंचायत की शामलात और सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम पर पोर्टल पर चढ़ाया गया। पोर्टल पर पंजीकरण आढ़तियों के नाम से हुआ, जबकि जमीन के पट्टेदार (लीज होल्डर) कोई और ही दिखाए गए। बंजर और गैर-खेती योग्य जमीन को खेती योग्य दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने की कोशिश की गई। उपायुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दोनों सरपंचों के खिलाफ लगे आरोप जांच में सही पाए गए हैं।

निलंबन और चार्ज

दोनों सरपंचों को तुरंत पद से हटा दिया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राम पंचायत की तमाम चल-अचल संपत्ति और रिकॉर्ड पंचायत के बहुमत प्राप्त पंच को सौंप दें। मामले की गहराई से जांच के लिए SDM नीलोखेड़ी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस खेल में और कौन-कौन से अधिकारी या बिचौलिए शामिल थे।

भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश

इस कार्रवाई से जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल किसानों की सुविधा के लिए है और इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकारी जमीन को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना पंचायती राज अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है।

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