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The Haryana Story | कैथल सिविल हॉस्पिटल में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर: 48 घंटे से बिजली गुल, जनरेटर ठप, मोबाइल की रोशनी में कट रही पर्चियाँ

कैथल सिविल हॉस्पिटल में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर: 48 घंटे से बिजली गुल, जनरेटर ठप, मोबाइल की रोशनी में कट रही पर्चियाँ

एक्स-रे और सीटी स्कैन बंद, एक्सीडेंट के मरीज बेहाल

हरियाणा के कैथल स्थित नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) में पिछले दो दिनों से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बिजली कटने के साथ-साथ अस्पताल का बैकअप जनरेटर भी तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है। इस दोहरी मार की वजह से अस्पताल में एक्स-रे, सीटी स्कैन और लैब टेस्ट समेत तमाम आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। अस्पताल परिसर के भीतर कई वार्डों और ओपीडी काउंटरों पर घाना अंधेरा पसरा हुआ है।

मोबाइल टॉर्च के सहारे चल रहा पर्ची काउंटर

अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों का पंजीकरण करने के लिए कर्मचारियों को अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट का सहारा लेना पड़ रहा है। काउंटर पर अंधेरा होने के कारण कंप्यूटर बंद हैं, जिससे मरीजों की मैन्युअल पर्चियां काटने में लंबा समय लग रहा है। पर्ची कटवाने के लिए ही मरीजों को कई-कई घंटों तक लाइनों में खड़ा रहना पड़ रहा है।

एक्स-रे और सीटी स्कैन बंद, एक्सीडेंट के मरीज बेहाल

सड़क हादसों में घायल होकर आए गंभीर मरीजों की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय बनी हुई है। अंदरूनी चोटों और फ्रैक्चर का पता लगाने के लिए आवश्यक एक्स-रे और सीटी स्कैन मशीनें बिजली न होने के कारण बंद पड़ी हैं। कई मरीज पिछले दो दिनों से दर्द से कराहते हुए केवल इस इंतजार में बैठे हैं कि कब बिजली आएगी और कब उनका टेस्ट हो सकेगा। टेस्ट रिपोर्ट न मिलने के कारण डॉक्टर भी आगे का इलाज शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

बुखार के मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज

मौसम में बदलाव के कारण अस्पताल में इन दिनों बुखार और मौसमी बीमारियों के मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। नियमानुसार, बिना ब्लड टेस्ट रिपोर्ट के डॉक्टर मरीजों को दवाइयाँ नहीं लिख रहे हैं। लैब की मशीनें ठप होने से मरीजों के खून की जांच नहीं हो पा रही है, जिसके चलते सैकड़ों मरीज बिना इलाज और बिना दवाइयाँ लिए ही अस्पताल से वापस लौटने को मजबूर हैं।

मरीजों और तीमारदारों का फूटा गुस्सा

अस्पताल में दूर-दराज के गांवों से आए मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। तीमारदारों का कहना है कि सरकार और प्रशासन बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जिला स्तर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली का वैकल्पिक इंतजाम तक नहीं है। गरीब मरीज निजी केंद्रों पर महंगे दामों में एक्स-रे और सीटी स्कैन करवाने को मजबूर हो रहे हैं, जो उनकी आर्थिक पहुंच से बाहर है।

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