हरियाणा के यमुनानगर में डिजिटल अरेस्ट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सिविल अस्पताल से रिटायर्ड डॉक्टर नरेंद्र छाबड़ा से साइबर ठगों ने 1 करोड़ 42 लाख 9 हजार 22 रुपये की बड़ी रकम ठग ली। ठगों ने डॉक्टर और उनकी पत्नी को करीब 18 दिनों तक खौफ के साए में रखा और खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताकर इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 18 दिन तक रखा झांसे में
यमुनानगर के जगाधरी स्थित अंसल टाउन के निवासी और सिविल अस्पताल के पूर्व डॉक्टर नरेंद्र छाबड़ा साइबर अपराधियों की एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो गए। ठगों ने उन्हें इस कदर मानसिक रूप से डरा दिया कि वह लगातार 18 दिनों तक खुद को एक आधिकारिक सरकारी जांच के दायरे में समझते रहे। इस दौरान जालसाजों ने उनके बैंक खातों से कुल 1,42,09,022 रुपये पार कर दिए।
3 जून को आई एक कॉल और बदल गई जिंदगी
डॉ. नरेंद्र छाबड़ा के अनुसार, इस खौफनाक सिलसिले की शुरुआत 3 जून 2026 को हुई। उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले शातिर अपराधी ने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी का एक बड़ा अधिकारी बताया। उसने डॉक्टर को डराते हुए कहा:"एक बड़े अपराधी को गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से आपके बेहद गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) में किया गया है।
घर को ही बना दिया 'डिजिटल जेल', 24 घंटे ऑन रखवाया कैमरा
कार्रवाई और तुरंत गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर अपराधियों ने डॉक्टर और उनकी पत्नी को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद शुरू हुआ 'डिजिटल अरेस्ट' का वो दौर जो अगले 18 दिनों तक जारी रहा। ठगों ने डॉक्टर दंपत्ति को सख्त हिदायत दी कि:वे अपने घर से बाहर कदम नहीं रखेंगे।इस मामले के बारे में अपने रिश्तेदारों या किसी भी बाहरी व्यक्ति से कोई बातचीत नहीं करेंगे।उनके मोबाइल फोन का कैमरा 24 घंटे लगातार ऑन रहेगा ताकि ठग उन पर नजर रख सकें। सरकारी जांच के नाम पर डॉक्टर डरे रहे और ठगों के हर एक निर्देश का आंख मूंदकर पालन करते रहे, जिसके चलते उन्होंने कई किश्तों में 1.42 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब होश उड़ा, तब पहुंचे साइबर थाने
लगातार पैसे ऐंठने और दबाव बनाने के बाद जब डॉक्टर को कुछ अजीब लगा, तो उन्हें अपने साथ हुई इस बड़ी ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत हिम्मत जुटाई और साइबर अपराध थाने में इसकी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही यमुनानगर साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और उन बैंक खातों को खंगाला जा रहा है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
साइबर पुलिस की अपील: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती
इस घटना के बाद पुलिस ने आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है। कानूनन सीबीआई, एनआईए, ईडी, पुलिस या कोई भी सुरक्षा एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या अरेस्ट नहीं कर सकती और न ही घर में कैद रहने को कह सकती है। कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने या खातों की जांच के नाम पर रकम जमा करने के लिए नहीं कहती। यदि आपके पास ऐसा कोई डराने वाला कॉल आता है, तो घबराएं नहीं। तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
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