loader
The Haryana Story | विदेशी फंडिंग केस में जांच एजेंसियों का बड़ा एक्शन, 4 शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी, 5 से अधिक कंपनियां रडार पर

विदेशी फंडिंग केस में जांच एजेंसियों का बड़ा एक्शन, 4 शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी, 5 से अधिक कंपनियां रडार पर

डिजिटल मार्केटिंग और इन्फ्लुएंसर कंपनियों पर गहराया शक

AI-Generated Images

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों के बाद, जांच एजेंसियों ने आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए कथित तौर पर मिली विदेशी फंडिंग के मामले में अपनी जांच का दायरा बेहद व्यापक कर दिया है। सुरक्षा और वित्तीय जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि प्रदर्शनों के दौरान किस तरह और किन गुप्त माध्यमों से पैसे जुटाए गए थे।

बीते तीन दिनों से छापेमारी जारी

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर हुए CJP के प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग के इनपुट के बाद जांच एजेंसियों द्वारा मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और दिल्ली के कई ठिकानों पर बीते तीन दिनों से छापेमारी जारी है। 5 से ज्यादा कंपनियां रडार पर, जिनमें कुछ बड़ी डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कंपनियां शामिल हैं। विदेश से फंड लेकर माहौल बिगाड़ने, टूलकिट चलाने और सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने का संदेह है।

डिजिटल मार्केटिंग और इन्फ्लुएंसर कंपनियों पर गहराया शक

जांच एजेंसियों के अनुसार, जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाने और छात्रों के गुस्से को हवा देने के पीछे एक सोची-समझी डिजिटल रणनीति काम कर रही थी।“जांच एजेंसियों के रडार पर पांच से ज्यादा कंपनियां हैं। इनमें कुछ डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के लिए काम करने वाली कंपनियां भी हैं। कंपनियों के बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि फंडिंग के असली स्रोत का पता लगाया जा सके।

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हो चुकी है याचिका

CJP के इस आंदोलन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि जो प्रदर्शन छात्रों की मांगों से शुरू हुआ था, वह बाद में देश-विरोधी तत्वों और विदेशी संगठनों के इशारे पर एक बड़े राजनीतिक षड्यंत्र में बदल गया।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख

इस मामले पर राजनीतिक घमासान और दावों के बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कुछ दिनों पहले स्पष्ट किया था कि फिलहाल मंत्रालय के पास सार्वजनिक तौर पर साझा करने के लिए इस विदेशी फंडिंग के संबंध में कोई अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी नहीं है। विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को भी भ्रामक बताया था जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार ने विदेशी फंडिंग की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार हर पहलू को बिना पुख्ता सबूतों के उजागर नहीं करना चाहती और इसी वजह से ऑन-ग्राउंड जांच को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

Join The Conversation Opens in a new tab
×