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The Haryana Story | देश में लागू हुआ सबसे सख्त 'एंटी-पेपर लीक कानून', राष्ट्रपति मुर्मु ने दी संशोधन बिल को मंजूरी, हर राज्य में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

देश में लागू हुआ सबसे सख्त 'एंटी-पेपर लीक कानून', राष्ट्रपति मुर्मु ने दी संशोधन बिल को मंजूरी, हर राज्य में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

अब खैर नहीं! पेपर लीक माफिया को 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ का होगा जुर्माना

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब देश में यह सख्त एंटी-पेपर लीक बिल आधिकारिक तौर पर कानून बन गया है। इस नए और कड़े संशोधित कानून के तहत अब पेपर लीक और नकल माफियाओं के खिलाफ अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, किसी भी मामले की जांच दो महीने यानी 60 दिन के भीतर पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है।

केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया

देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले परीक्षा माफिया और पेपर लीक गिरोहों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुके 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद कानून मंत्रालय ने इसकी गजट अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिससे यह देश भर में प्रभावी हो गया है। यह नया कानून पूर्व में बनाए गए 2024 के अधिनियम को और अधिक सशक्त और कड़ा बनाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है।

नए कानून की 5 सबसे बड़ी बातें

समयबद्ध जांच (Time-bound Investigation): पेपर लीक या परीक्षा में धांधली की एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस या केंद्रीय एजेंसियों को 2 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट और त्वरित न्याय: हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद रोजाना सुनवाई होगी और अधिकतम 3 महीने (90 दिन) के भीतर मामले का निपटारा कर सजा का ऐलान करना होगा।

संगठित गिरोहों पर महा-अंकुश: यदि पेपर लीक में कोई संगठित गिरोह (सिंडिकेट) या कोचिंग माफिया शामिल पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 साल से लेकर 10 साल तक की सख्त कैद और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भुगतना होगा।

व्यक्तिगत अपराधों पर कड़ी कार्रवाई: व्यक्तिगत स्तर पर नकल करने, कराने या पेपर लीक में मदद करने वाले दोषियों को 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है (जो पहले मात्र 10 लाख रुपये था)।

स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन: मामलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्र सरकार एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करेगी।

इन 15 अपराधों पर सीधे कसी जाएगी नकेल

नए कानून के तहत कुल 15 अवैध गतिविधियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें शामिल होने पर सीधी गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई होगी। प्रश्न पत्र या आंसर-की को समय से पहले लीक करना या उसकी अनधिकृत पहुंच बनाना। परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ करना। फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना या फर्जी वेबसाइट बनाना। परीक्षा केंद्र में कंप्यूटर नेटवर्क या सर्वर को हैक करना या डिजिटल नकल करना। किसी अन्य उम्मीदवार के स्थान पर परीक्षा देना।

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : पीएम मोदी

संसद से बिल पारित होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं को भरोसा देते हुए कहा कि पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ एक बेहद सख्त कानून बनाने का महत्वपूर्ण कार्य पूरा हो चुका है। सरकार आधुनिक तकनीक और कड़े कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि किसी भी ईमानदार और मेहनती छात्र का हक न मारा जाए।

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