सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' मॉडल पर पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। देश की सड़कों पर बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के धड़ल्ले से चल रहे वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा बीमा नियामक IRDAI को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का आदेश दिया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत, यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो देश के पेट्रोल पंपों पर उसे ईंधन (पेट्रोल/डीजल) देने से साफ मना किया जा सकेगा।यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर उचित मुआवजा मिल सके, जिन्हें अभी बीमा न होने के कारण दर-दर भटकना पड़ता है।
कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?
अदालत ने इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए आधुनिक डिजिटल और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल करने को कहा है। नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरों को सीधे 'वाहन VAHAN' पोर्टल और इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। पेट्रोल पंपों पर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जो तेल डालने से ठीक पहले गाड़ी के नंबर से उसके लाइव इंश्योरेंस स्टेटस को चेक कर लेगी। बीमा एक्सपायर होने पर फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीन ब्लॉक हो सकती है। जमीनी स्तर पर जांच के लिए पुलिस कर्मियों को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएंगे, जिससे वे मौके पर ही वाहन का रियल-टाइम बीमा चेक करके तुरंत ई-चालान काट सकेंगे।
नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि भी बढ़ी
इस बड़े फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नए वाहन खरीदारों को राहत देते हुए और सुरक्षा बढ़ाते हुए अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अवधि को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है। नई कारों के लिए अब अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा 3 साल की जगह 4 साल के लिए होगा। नए दोपहिया अब अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा 5 साल की जगह 6 साल के लिए किया जाएगा।
देश में हालात 'चौंकाने वाले': 56% गाड़ियों का कोई बीमा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय स्थायी समिति (2024-25) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस बात पर गहरी चिंता और हैरानी जताई कि भारत की सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 प्रतिशत (करीब 16.54 करोड़) वाहन बिना किसी इंश्योरेंस के चल रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' नियम के दोतरफा फायदे होंगे। पहला बिना रजिस्ट्रेशन और बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की तुरंत पहचान हो सकेगी। दूसरा तेल न मिलने के डर से वाहन मालिक समय पर अपना इंश्योरेंस रिन्यू कराने के लिए मजबूर होंगे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस संबंध में सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति जताई है। फिलहाल कोर्ट ने संबंधित विभागों को 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने को कहा है और अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को तय की है।
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