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The Haryana Story | वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार: मुंबई के कपड़ा व्यापारी का सोनीपत के वृद्धाश्रम में निधन, बेटियों ने 5100 रुपए भेजकर बनाई दूरी

वीडियो कॉल पर देखा पिता का अंतिम संस्कार: मुंबई के कपड़ा व्यापारी का सोनीपत के वृद्धाश्रम में निधन, बेटियों ने 5100 रुपए भेजकर बनाई दूरी

बेटियों ने आश्रम प्रबंधन से वीडियो कॉल पर ही मुखाग्नि दिखाने तथा संस्कार का पूरा वीडियो भेजने की बात कही।

हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम से दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मुंबई के कभी बड़े कपड़ा व्यापारी रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता (74) का निधन हो गया। उनकी मौत के बाद उनकी तीन बेटियों ने दूरी और नौकरी का हवाला देकर अंतिम संस्कार में आने से साफ मना कर दिया। बेटियों ने केवल 5100 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए और आश्रम प्रबंधन से वीडियो कॉल पर ही मुखाग्नि दिखाने तथा संस्कार का पूरा वीडियो भेजने की बात कही।

रईसी से वृद्धाश्रम तक का सफर

महाराष्ट्र की मायानगरी मुंबई के कपड़ा बाजार में कभी शिवचरण रामरतन गुप्ता का बहुत बड़ा नाम था। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां नीता, निशा और प्रिया थीं। दोनों दंपत्ति ने बेटियों को बेटों की तरह पाला, उच्च शिक्षा दिलाई और धूमधाम से उनकी शादियां कीं। वक्त बदला और व्यापार में भारी नुकसान के चलते शिवचरण कर्ज और आर्थिक तंगी में डूब गए। तंगी और पारिवारिक हालातों के कारण उन्हें मुंबई छोड़ना पड़ा। पति-पत्नी करीब 3 साल पहले सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में आए थे।

दो साल पहले हो गया था पत्नी का देहांत

दो साल पहले उनकी पत्नी का भी आश्रम में ही देहांत हो गया था। वे वर्तमान में वेस्ट रामनगर स्थित 'समाज कल्याण शिक्षा समिति' के आश्रम में रह रहे थे। आश्रम संचालक आनंद कुमार के अनुसार, शिवचरण को करीब 15 दिन पहले पेट में संक्रमण की शिकायत हुई थी। इलाज के बाद सुधार हुआ, लेकिन सोमवार रात वे खाना खाकर सोए और मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे केयरटेकर ने उन्हें अपने कमरे में अचेत पाया।

बेटियों का हैरान करने वाला रवैया: आश्रम संचालक के बड़े खुलासे

आश्रम संचालक आनंद कुमार और सामाजिक संस्थाओं ने बताया कि बेटियों का यह व्यवहार बेहद असंवेदनशील और इंसानियत को सन्न करने वाला था। शिवचरण रामरतन गुप्ता की मौत के बाद जब उनकी बेटियों को फोन किया गया तो लगा था कि पिता कि मृत्यु की खबर सुनते ही वे तुरंत पहुंचेंगी, लेकिन सभी ने कोई न कोई कारण देते हुए आने से मना कर दिया। नेपाल में रह रही बड़ी बेटी नीता ने कहा- 'बहुत दूर हूं, आना संभव नहीं', मंझली बेटी निशा जो आजमगढ़, यूपी में रहती है, उसने कहा 'मैं नहीं पहुंच सकती' और मुंबई में रह रही छोटी बेटी प्रिया ने कहा- 'हम इतनी जल्दी नहीं आ सकते, आप फोन पर ही संस्कार दिखा दीजिए'।

चिता की आग के बीच पूछा- 'और कितना टाइम लगेगा?

'जब वीडियो कॉल पर मुखाग्नि दी जा रही थी, तब बेजान पिता का चेहरा देखकर बेटी के मुंह से सिर्फ 'पापा...' निकला। हद तो तब हो गई जब चिता जल रही थी और फोन पर बेटी पूछ रही थी कि 'अभी और कितना टाइम लगेगा?" संचालक ने जब कहा कि 10-15 मिनट लगेंगे तो बेटी ने कहा, 'सारा काम अच्छे से हो गया ना, मुझे सारी वीडियो भेज देना।'

अस्थियां लेने से भी मना किया

एक रिपोर्ट के अनुसार जब छोटी बेटी प्रिया से पूछा गया कि क्या आप पिता की अस्थियां चुनकर गंगा में प्रवाहित करने आएंगी? तो उसका जवाब था- 'अब तो पिताजी दुनिया में ही नहीं रहे, तो अब आकर क्या करेंगे? अब कुछ बचा ही नहीं है।'

संस्था ने निभाया 'पुत्र धर्म'

बेटियों की इस घोर बेरुखी के बाद 'समाज कल्याण शिक्षा समिति' और सोनीपत की स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर शिवचरण गुप्ता का पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया। संस्था ने ही निर्णय लिया है कि वे खुद उनके बेटे का फर्ज निभाते हुए उनकी अस्थियों को गंगा जी में विसर्जित करेंगे। 

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