loader
The Haryana Story | ‘उम्मीद है यहां भी एक्टिंग नहीं कर रहे’, सुप्रीम कोर्ट की राजपाल यादव को दो टूक; ₹2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका

‘उम्मीद है यहां भी एक्टिंग नहीं कर रहे’, सुप्रीम कोर्ट की राजपाल यादव को दो टूक; ₹2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका

अदालत ने उन्हें यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया है

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत तो मिली है, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि अब उनके पास ज्यादा समय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजपाल यादव को ₹2 करोड़ की रकम जमा करने के लिए दो सप्ताह की अंतिम मोहलत दी। अदालत ने उन्हें यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया है।

उनके पिछले आचरण से भरोसा पैदा नहीं होता

साथ ही राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी सरेंडर करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव के पिछले आचरण पर नाराजगी जताई। अभिनेता की ओर से जब दो सप्ताह का और समय मांगा गया तो कोर्ट ने टिप्पणी की कि वे अभिनेता हैं और उम्मीद है कि “यहां भी एक्टिंग नहीं कर रहे होंगे।” अदालत ने यह भी कहा कि उनके पिछले आचरण से भरोसा पैदा नहीं होता। इसके बाद कोर्ट ने इसे आखिरी अवसर बताते हुए दो सप्ताह का समय दिया। 

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े वित्तीय लेनदेन और चेक बाउंस मामलों से संबंधित है। रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म के लिए वर्ष 2010 में करीब ₹5 करोड़ का कर्ज लिया गया था। बाद में रकम और ब्याज बढ़ने के साथ विवाद करीब ₹9 करोड़ तक पहुंच गया। इस मामले में राजपाल यादव के खिलाफ कई चेक बाउंस केस दर्ज हुए थे। इन मामलों में उन्हें पहले दोषी ठहराया जा चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी जुलाई 2026 में उनकी सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सितंबर की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ तत्काल सरेंडर से राहत दी थी।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ₹2 करोड़ जमा करने के लिए दिया गया दो सप्ताह का समय अंतिम अवसर है। अदालत ने उनकी सरेंडर से मिली छूट को फिलहाल जारी रखा है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। यानी अब राजपाल यादव को अदालत के निर्देश का पालन कर रकम जमा करनी होगी, वरना उन्हें दोबारा कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

Join The Conversation Opens in a new tab
×