लालमोनिरहाट। प्लास्टिक कचरा आज पूरी दुनिया के लिए बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है, लेकिन बांग्लादेश के एक दंपती ने इसी कचरे को घर बनाने में इस्तेमाल कर अनोखी मिसाल पेश की है। लालमोनिरहाट जिले के नवादाबाश गांव में करीब 80 हजार बेकार प्लास्टिक बोतलों की मदद से एक ऐसा घर तैयार किया गया है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस अनोखे प्रयोग के पीछे रिटायर्ड शिक्षक राशेदुल इस्लाम और उनकी पत्नी अस्मा खातून का विचार है। दंपती ने प्रदूषण कम करने और प्लास्टिक कचरे के दोबारा इस्तेमाल का रास्ता तलाशते हुए बोतलों से घर बनाने का फैसला किया। अस्मा ने जापान में प्लास्टिक बोतलों से बने घर का वीडियो देखने के बाद इस तरह के घर का डिजाइन तैयार किया।
रेत से भरी बोतलों से तैयार हुई दीवारें
इस घर में इस्तेमाल की गई बोतलों को खाली छोड़ने के बजाय उनमें रेत भरी गई और फिर उन्हें सीमेंट-रेत के मिश्रण यानी मोर्टार की मदद से एक-दूसरे के ऊपर लगाया गया। बोतलों के निचले हिस्से दीवारों के बाहरी हिस्से में दिखाई देते हैं, जिससे घर का रूप सामान्य ईंटों से बने मकान से काफी अलग नजर आता है। बताया गया है कि करीब 1,700 वर्ग फुट में बने इस एक मंजिला मकान में चार बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, दो बाथरूम, कॉरिडोर और बरामदा होगा। घर में 11 खिड़कियां और सात दरवाजे भी रखे गए हैं।
करीब 4 लाख बांग्लादेशी टका खर्च आने का अनुमान
दंपती के अनुसार इस घर को तैयार करने में करीब 4 लाख बांग्लादेशी टका खर्च आने का अनुमान है। रिपोर्ट में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के हवाले से दावा किया गया है कि इसकी लागत पारंपरिक ईंटों से बने मकान की तुलना में लगभग एक-चौथाई हो सकती है। हालांकि, इस तरह के निर्माण की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊपन को लेकर स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि जरूरी है। इससे पहले बांग्लादेश में ही शफीकुल इस्लाम नाम के व्यक्ति द्वारा करीब 80 हजार प्लास्टिक बोतलों से घर बनाने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है।
निर्माण लागत ईंट-सीमेंट के मकान से करीब 30 प्रतिशत कम होने का दावा
उस मामले में बोतलों में रेत भरकर उनका इस्तेमाल किया गया था और निर्माण लागत ईंट-सीमेंट के मकान से करीब 30 प्रतिशत कम होने का दावा किया गया था। यानी प्लास्टिक की बेकार बोतलों को कचरा मानकर फेंकने के बजाय उनका रचनात्मक इस्तेमाल किया जाए तो वे निर्माण सामग्री के रूप में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। हालांकि ऐसे घरों की सुरक्षा, आग से बचाव और संरचनात्मक मजबूती की पुष्टि विशेषज्ञ इंजीनियरों से कराना जरूरी है।
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