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The Haryana Story | UPI शुल्क पर सैलजा का सवाल- जब डिजिटल भुगतान को मुफ्त बताया तो अब MDR की जरूरत क्यों?

UPI शुल्क पर सैलजा का सवाल- जब डिजिटल भुगतान को मुफ्त बताया तो अब MDR की जरूरत क्यों?

‘डिजिटल भुगतान को कमाई का जरिया न बनाए सरकार’, बोलीं - छोटे दुकानदारों पर बढ़ेगा लागत का दबाव

सिरसा की सांसद एवं कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब सरकार उसी व्यवस्था में शुल्क लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सैलजा ने प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग की है। सैलजा ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने का निर्णय व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।

मर्चेंट शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी

उनके अनुसार सरकार इसे व्यापारियों पर लगने वाला शुल्क बता रही है, लेकिन बढ़ी हुई लागत का असर आगे चलकर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई लेन-देन, 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान और प्रतिमाह एक लाख रुपये तक यूपीआई भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों पर शुल्क नहीं लगेगा। इसके बावजूद सैलजा ने सवाल उठाया कि जिस यूपीआई व्यवस्था को अब तक नि:शुल्क और जनहितैषी बताते हुए बढ़ावा दिया गया, उसमें मर्चेंट शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। 

‘बढ़ी लागत का भार ग्राहकों पर पड़ सकता है’

कुमारी सैलजा ने उदाहरण देते हुए कहा कि 3,000 रुपये के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से 12 रुपये और 50,000 रुपये के भुगतान पर 200 रुपये MDR बनता है। उनका कहना है कि व्यापारियों पर आने वाली यह अतिरिक्त लागत भविष्य में उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकती है। सैलजा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने की आशंका को लेकर सरकार पर सवाल उठा चुके हैं।

उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि नई व्यवस्था तैयार करते समय किन संस्थाओं और कंपनियों से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने राहुल गांधी के उस सवाल का भी उल्लेख किया जिसमें डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने और अमेरिकी दबाव के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाया गया था। सैलजा ने कहा कि केंद्र सरकार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

छोटे व्यापारियों पर असर की जताई आशंका

सैलजा ने कहा कि छोटे दुकानदार पहले से ही महंगाई, कमजोर मांग, जीएसटी अनुपालन और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में बड़े यूपीआई भुगतानों पर MDR लगने से व्यापारियों की लागत और बढ़ सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ व्यापारी बड़े मूल्य के यूपीआई भुगतान लेने से बच सकते हैं और ग्राहकों को नकद भुगतान करने के लिए कह सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि पात्र छोटे व्यापारियों की पहचान किस आधार पर की जाएगी और प्रतिमाह एक लाख रुपये की यूपीआई भुगतान सीमा पार होने के बाद व्यापारी किस प्रक्रिया के तहत शुल्क वाली श्रेणी में आएंगे।

‘यूपीआई को वसूली का माध्यम न बनाया जाए’

कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर प्रस्तावित MDR वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यूपीआई आम लोगों की सुविधा और डिजिटल वित्तीय समावेशन का माध्यम है। इसे सरकार, बैंकों या निजी कंपनियों के लिए वसूली का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के मुद्दे को उठाती रहेगी।

18 से 20 सितंबर तक विभिन्न जिलों के दौरे पर रहेंगी

सैलजा कुमारी सैलजा 18 से 20 सितंबर तक असंध, पंचकूला, कालका और सिरसा सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रवास पर रहेंगी।

18 सितंबर: असंध के जीएस फार्म में ब्लॉक कांग्रेस अधिवेशन में शामिल होंगी। इसके बाद बरवाला स्थित प्रभु स्वीट्स और पंचकूला सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित ब्लॉक कांग्रेस अधिवेशनों को संबोधित करेंगी।

19 सितंबर: पिंजौर के केके फार्म में आयोजित ब्लॉक कालका कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेंगी।

20 सितंबर: गांव कुत्ताबढ़ में शहीद सुखसैन सिंह के निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। इसके बाद सिरसा की नई अनाज मंडी में आयोजित भक्ति सत्संग में शामिल होंगी। वह पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, सिरसा में आमजन से मुलाकात करेंगी और नरवाना के एसडी महिला कॉलेज में आयोजित ब्लॉक कांग्रेस अधिवेशन में भी भाग लेंगी।

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