जापान में लंबी उम्र का एक नया रिकॉर्ड सामने आया है। देश में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या पहली बार एक लाख के पार पहुंचने की खबर है। स्वस्थ खान-पान, सक्रिय जीवनशैली और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल को जापान में लंबी उम्र से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, शतायु होने के पीछे केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि आनुवंशिकता, सामाजिक परिस्थितियां और स्वास्थ्य सेवाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जापान के स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 तक देश में 100 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 1,07,677 लोग दर्ज किए गए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 7,914 अधिक है। इस तरह जापान में शतायु लोगों की संख्या पहली बार एक लाख के पार पहुंच गई है।
100 साल पार करने वालों में करीब 88 प्रतिशत महिलाएं
जापान में शतायु लोगों की संख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 88 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, देश की सबसे बुजुर्ग महिला फुयो किशिमोतो की उम्र 114 वर्ष है, जबकि सबसे बुजुर्ग पुरुष हिकारू काटो 112 वर्ष के हैं। मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 1963 में जब जापान में शतायु लोगों की गिनती शुरू हुई थी, तब इनकी संख्या महज 153 थी। इसके बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया है। वर्ष 2026 में लगातार 56वें साल शतायु लोगों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई।
लंबी उम्र के पीछे खान-पान और जीवनशैली की भूमिका
जापान में लोगों की लंबी उम्र के पीछे संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधियों, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और स्वस्थ जीवनशैली को संभावित योगदानकर्ता माना जाता है। जापान के स्वास्थ्य मंत्री केनिचिरो उएनो ने भी चिकित्सा तकनीक में प्रगति, खान-पान और जीवनशैली को लोगों के लंबे समय तक स्वस्थ एवं सक्रिय रहने से जोड़ा है। जापानी खान-पान में मछली, सब्जियां, चावल, सोया उत्पाद और सीमित मात्रा में भोजन जैसे पहलुओं का उल्लेख अक्सर किया जाता है। वहीं, रोजमर्रा की गतिविधियों में सक्रिय रहना और सामाजिक संपर्क बनाए रखना भी स्वस्थ उम्र बढ़ने से जुड़ा माना जाता है। हालांकि, केवल किसी एक खाद्य पदार्थ या आदत को 100 साल तक जीने का निश्चित कारण नहीं कहा जा सकता।
बढ़ती उम्र के साथ जापान के सामने नई चुनौतियां
शतायु लोगों की संख्या में वृद्धि जापान में बढ़ती उम्र वाली आबादी की तस्वीर भी पेश करती है। देश की कुल आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने और जन्मदर में गिरावट के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जापान की आबादी में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। ऐसे में लंबी उम्र के साथ बुजुर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, देखभाल और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना भी देश के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन रहा है।
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