भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के मुताबिक, भारत में बनी चिप की दुनियाभर में सप्लाई शुरू हो गई है। सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की बढ़ती भागीदारी को देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, चिप की वैश्विक सप्लाई शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि भारत अभी सभी प्रकार की सेमीकंडक्टर चिप का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने लगा है। इस क्षेत्र में वास्तविक प्रगति को समझने के लिए उत्पादन शुरू होने, चिप के व्यावसायिक इस्तेमाल और आयात पर निर्भरता जैसे पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है।
भारतीय चिप उद्योग ने पकड़ी रफ्तार, तीन परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित SEMICON India 2026 के उद्घाटन के दौरान भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए नया और भरोसेमंद वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की फैक्ट्रियों से चिप निकलकर अब देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए पसंदीदा स्थान बनने की दिशा में नीतिगत सुधार, निवेश और तकनीकी सहयोग पर काम कर रहा है। उन्होंने वैश्विक कंपनियों से भारत में अनुसंधान, नवाचार और चिप निर्माण के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
पांच साल में शुरुआती उद्योग से व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचा भारत
SEMICON India 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। इस बार सम्मेलन की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम: इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। इसमें देश-विदेश की सेमीकंडक्टर कंपनियां, निवेशक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और शैक्षणिक संस्थान हिस्सा ले रहे हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की थी। इसके तहत चिप निर्माण, असेंबली, पैकेजिंग और संबंधित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार के पहले चरण में कुल 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से तीन परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। अब सरकार का जोर इस उद्योग को और व्यापक बनाने पर है।
सेमीकॉन 2.0 के तहत ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान
सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार के लिए सरकार ने दूसरे चरण यानी सेमीकॉन 2.0 के तहत लगभग ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इस चरण में केवल चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों पर ही नहीं, बल्कि पूरे उद्योग से जुड़ी आपूर्ति शृंखला विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, उपकरण, सामग्री, कुशल मानव संसाधन और घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को मजबूत करने जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 सितंबर को बताया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत उपकरण, सामग्री, गैस, रसायन और सब्सट्रेट जैसे क्षेत्रों में 11 से 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों पर अगले दो से तीन वर्षों में निवेश आने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, कंपनियों के नाम और अंतिम निवेश संबंधी घोषणाएं अभी सभी मामलों में सामने नहीं आई हैं।
माइक्रोन के गुजरात संयंत्र से वैश्विक ग्राहकों तक पहुंच रहे उत्पाद
भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन की दिशा में गुजरात के साणंद स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजी के संयंत्र को महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। कंपनी के सीईओ संजय मेहरोत्रा के मुताबिक, साणंद संयंत्र से DRAM और NAND मेमोरी उत्पादों की वैश्विक ग्राहकों को आपूर्ति शुरू हो चुकी है। यह भारत में चिप उद्योग के व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ने का एक उदाहरण है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मेमोरी उत्पादों की असेंबली और टेस्टिंग के जरिए वैश्विक आपूर्ति शुरू होना तथा अत्याधुनिक चिप का पूरा निर्माण करना अलग-अलग औद्योगिक प्रक्रियाएं हैं। भारत में इन क्षेत्रों का विकास अलग-अलग चरणों में हो रहा है।
वैश्विक कंपनियों की भारत में बढ़ रही भागीदारी सेमीकॉन इंडिया
सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। जर्मनी की सेमीकंडक्टर कंपनी इन्फिनियॉन टेक्नोलॉजीज के सीईओ योखेन हानेबेक ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में महत्वपूर्ण अवसरों वाला बाजार बताया। कंपनी के भारत में 2,800 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने माइक्रोन, एएसएमएल, इंटेल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की। चर्चा में निवेश, तकनीकी सहयोग और कुशल प्रतिभाओं के विकास जैसे विषय शामिल रहे।
चिप की कमी से फोन और कार महंगे क्यों हो सकते हैं?
सेमीकंडक्टर चिप आज मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर, औद्योगिक मशीनों और अनेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अहम हिस्सा है। चिप की उपलब्धता में कमी आने पर इन उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
मोबाइल फोन: प्रोसेसर, मेमोरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों की उपलब्धता प्रभावित होने पर उत्पादन लागत और बाजार में उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
कारें: इंजन नियंत्रण, सुरक्षा प्रणाली, सेंसर और मनोरंजन प्रणाली सहित कई कार्यों में चिप का इस्तेमाल होता है। आपूर्ति बाधित होने पर वाहन उत्पादन में देरी हो सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक सामान: कंप्यूटर, टीवी और अन्य उपकरणों के उत्पादन में भी सेमीकंडक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि, चिप की कमी होने पर हर फोन या कार की कीमत तुरंत बढ़े, यह जरूरी नहीं है। कीमतों पर असर चिप की उपलब्धता, उत्पादन लागत, कंपनियों की रणनीति, मांग और अन्य आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
भारत के सामने क्या हैं चुनौतियां?
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार हो रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए कई क्षेत्रों में लगातार निवेश की जरूरत होगी। इनमें अत्याधुनिक चिप निर्माण तकनीक, विशेष उपकरणों और सामग्रियों की उपलब्धता, प्रशिक्षित इंजीनियरों की संख्या, अनुसंधान क्षमता और मजबूत घरेलू आपूर्ति शृंखला का विकास शामिल है। भारत की मौजूदा रणनीति में चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों तक व्यापक इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अब केवल योजनाओं और निवेश घोषणाओं तक सीमित नहीं है। कुछ परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन और वैश्विक ग्राहकों तक उत्पादों की आपूर्ति शुरू होना इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। हालांकि, भारत को दुनिया का प्रमुख चिप निर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्पादन क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू आपूर्ति शृंखला को लगातार मजबूत करना होगा। आने वाले वर्षों में सेमीकॉन 2.0 के तहत होने वाला निवेश इस क्षेत्र की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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