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The Haryana Story | हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर कैशलेस भुगतान बंद करने की चेतावनी, ₹5 UPI चार्ज को लेकर डीलर्स में नाराजगी

हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर कैशलेस भुगतान बंद करने की चेतावनी, ₹5 UPI चार्ज को लेकर डीलर्स में नाराजगी

पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्रालय को भेजा ज्ञापन, डिजिटल भुगतान पर शुल्क से राहत देने की मांग

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हिसार। हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ₹2,000 से अधिक के यूपीआई (UPI) लेनदेन पर ₹5 शुल्क लगाए जाने के दावे का पेट्रोलियम डीलर्स ने विरोध किया है। ऑल हरियाणा पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AHPDA) ने चेतावनी दी है कि यदि पेट्रोल पंपों को इस शुल्क से राहत नहीं दी गई, तो राज्यभर में कैशलेस भुगतान की सुविधा बंद करने का कदम उठाया जा सकता है।

एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान की सुविधा ग्राहकों की सहूलियत के लिए उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डीलर्स पर पड़ने से उनके कारोबार और भुगतान व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। एसोसिएशन ने पेट्रोल पंपों को यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से मुक्त रखने की मांग उठाई है।

15 अक्टूबर से लागू होने की खबर, पेट्रोल पंपों पर बढ़ेगा डिजिटल भुगतान का खर्च

रिपोर्टों के मुताबिक, नए शुल्क ढांचे में ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% MDR का प्रावधान है। पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए ₹5 का निर्धारित शुल्क बताया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी सामने आई है। डीलर्स का कहना है कि पेट्रोल पंपों का प्रति लीटर कमीशन सीमित होता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत उनकी कमाई को प्रभावित कर सकती है। इसी मुद्दे को लेकर देश के अन्य हिस्सों में भी पेट्रोल पंप संगठनों ने शुल्क से छूट की मांग उठाई है।

17 सितंबर को वित्त मंत्रालय को भेजा ज्ञापन

हिसार एसोसिएशन के प्रधान राजकुमार सलेमगढ़ के मुताबिक, इस मुद्दे पर 17 सितंबर की दोपहर वित्त मंत्रालय, दिल्ली को ईमेल के माध्यम से औपचारिक ज्ञापन भेजा गया। एसोसिएशन ने पेट्रोल पंपों को MDR से मुक्त रखने की मांग की है। एसोसिएशन की ओर से यह भी कहा गया है कि नियम पूरी तरह लागू होने से पहले ही इस पर आपत्ति दर्ज कराई जा रही है, ताकि पेट्रोल पंप संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

क्या ग्राहकों को देना होगा ₹5 अतिरिक्त?

इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट सामान्य तौर पर व्यापारी या सेवा प्रदाता से जुड़ा शुल्क है। इसे सीधे ग्राहक से वसूलने की बात अलग है। मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहकों पर सीधे UPI शुल्क डालने की अनुमति नहीं है। इसलिए ₹2,000 से अधिक का भुगतान करने वाले हर ग्राहक को पेट्रोल पंप पर अलग से ₹5 देना होगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा।

क्या पूरे हरियाणा में बंद हो जाएगी UPI सुविधा?

फिलहाल इसे एसोसिएशन की चेतावनी और विरोध के रूप में देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह पुष्टि नहीं होती कि हरियाणा के सभी पेट्रोल पंपों पर कैशलेस भुगतान बंद करने का अंतिम निर्णय लागू कर दिया गया है। यदि एसोसिएशन अपनी चेतावनी पर अमल करती है, तो ग्राहकों को पेट्रोल-डीजल खरीदते समय नकद भुगतान की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, डिजिटल भुगतान पूरी तरह बंद होगा या केवल ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर रोक लगेगी, इस बारे में स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि नहीं हैं। 

डीलर्स की प्रमुख मांगें

पेट्रोल पंपों को यूपीआई लेनदेन पर MDR शुल्क से पूरी तरह छूट दी जाए। पेट्रोलियम कारोबार की सीमित कमीशन व्यवस्था को ध्यान में रखा जाए। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल पंप संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डाला जाए। केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर राहत प्रदान करे।

ग्राहकों के लिए क्या मायने?

यदि पेट्रोल पंपों पर यूपीआई भुगतान सीमित किया जाता है, तो इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो बड़ी रकम का भुगतान डिजिटल माध्यम से करते हैं। ऐसे में नकद या उपलब्ध अन्य भुगतान विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी इस विरोध के चलते राज्यभर में कैशलेस सुविधा बंद होने की पुष्टि नहीं है। ग्राहकों को अपने नजदीकी पेट्रोल पंप पर उपलब्ध भुगतान विकल्पों की जानकारी लेकर ही भुगतान करना चाहिए।

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