उत्तर प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को गति देने के लिए प्रदेश के सभी जिला, तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों के आसपास स्थाई हेलीपैड बनाए जाएंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने 736 नए हेलीपैड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जमीन की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए अब इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, सरकारी अस्पतालों और अन्य संस्थानों की खाली पड़ी भूमि का भी उपयोग किया जाएगा।
शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित संस्थानों के अधिकारियों और प्रबंधन से बातचीत कर हेलीपैड निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि चिह्नित करें और प्रस्ताव शासन को भेजें। जहां भूमि उपलब्ध होगी, वहां लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से स्थाई हेलीपैड का निर्माण कराया जाएगा।
जमीन की कमी दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी जिलाधिकारियों को हेलीपैड निर्माण के लिए जल्द से जल्द भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिन तहसीलों और ब्लॉक मुख्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुसार जमीन मिलने में परेशानी हो रही है, वहां कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों की खाली भूमि का विकल्प तलाशने को कहा गया है। जिलाधिकारियों को संबंधित संस्थानों के प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था से उन क्षेत्रों में भी हेलीपैड निर्माण का रास्ता खुल सकेगा, जहां अब तक उपयुक्त भूमि नहीं मिल पा रही थी।
118 स्थानों पर जमीन उपलब्ध, जल्द शुरू होगा निर्माण
प्रमुख सचिव के अनुसार, प्रदेश में 118 नए हेलीपैड बनाने के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। इन स्थानों पर निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की तैयारी है। इन 118 हेलीपैड के निर्माण पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रदेश सरकार ने नए तहसील और ब्लॉक मुख्यालय भवनों के साथ-साथ नए सर्किट हाउस के निर्माण में भी स्थाई हेलीपैड की व्यवस्था शामिल की है। इससे भविष्य में सरकारी भवनों के निर्माण के साथ ही हेलीपैड विकसित करने की योजना को भी गति मिलेगी।
736 नए हेलीपैड और 17 पुराने की मरम्मत का लक्ष्य
पीडब्ल्यूडी ने चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 736 नए हेलीपैड बनाने के साथ ही 17 पुराने हेलीपैड की मरम्मत कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, अब तक 118 स्थानों पर ही नए हेलीपैड के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो सकी है। शेष स्थानों पर जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की योजना के मुताबिक, सभी 736 हेलीपैड बन जाने के बाद प्रदेश में लगभग हर 20 किलोमीटर पर एक हेलीपैड उपलब्ध होगा। इससे वीवीआईपी के दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन के साथ-साथ आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
किराया देकर आम लोग भी कर सकेंगे उपयोग
प्रस्तावित हेलीपैड का उपयोग केवल वीवीआईपी भ्रमण तक सीमित नहीं रहेगा। निर्धारित व्यवस्था के तहत अन्य लोग भी किराया देकर इनका उपयोग कर सकेंगे। इससे जरूरत के समय हेलीकॉप्टर के माध्यम से आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
हेलीपैड निर्माण के लिए तय हैं सख्त मानक
प्रत्येक स्थाई हेलीपैड के निर्माण के लिए 100 मीटर लंबी और 100 मीटर चौड़ी भूमि की आवश्यकता होगी। इसके अलावा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मानकों के अनुसार हेलीपैड के पूर्व और पश्चिम दिशा में 250 मीटर तक कोई ऊंचा अवरोध नहीं होना चाहिए। भूमि का चयन करते समय इन तकनीकी और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। ऐसे में जिलाधिकारियों को संस्थानों की खाली जमीन चिह्नित करने के साथ ही उसकी उपयुक्तता भी सुनिश्चित करनी होगी।
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