loader
The Haryana Story | मनमुटाव खत्म करें..अन्यथा पार्टी आलाकमान 'कद और पद' की परवाह किए बिना कड़ी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा

मनमुटाव खत्म करें..अन्यथा पार्टी आलाकमान 'कद और पद' की परवाह किए बिना कड़ी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा

कांग्रेस आलाकमान हरियाणा में इस महीने कर सकता है सगंठनात्म नियुक्तियां, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, छात्र संगठन जैसी कार्यकारिणी और पार्टी के अन्य प्रकोष्ठों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी

प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित पराजय से सबक लेते हुए कांग्रेस हाईकमान राज्य में पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए कमर कस रहा है। चूंकि पार्टी हरियाणा में सरकार बनाने में विफल रही है, इसलिए पार्टी हाईकमान को राज्य में संगठनात्मक ढांचे की जरूरत महसूस हुई है। हरियाणा में अपना स्वर्णिम काल वापस लाने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने राज्य के नेताओं को आपसी मनमुटाव खत्म करने की चेतावनी दी थी। करीब आधा दर्जन राज्य कांग्रेस प्रभारी पार्टी में गुटबाजी रोकने में विफल रहे हैं, लेकिन उम्मीदों के विपरीत स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कद और पद की परवाह किए बिना कड़ी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा

इस विवाद में पार्टी की कमान संभालते हुए राहुल गांधी ने हाल ही में एक बैठक में विपरीत धड़ों के सभी पार्टी दिग्गजों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पार्टी के प्रदेश नेताओं को एकजुट रहने के साथ-साथ पार्टी के निर्देशों का पालन करना होगा और सभी को साथ लेकर चलना होगा, अन्यथा पार्टी आलाकमान संबंधित नेताओं के खिलाफ उनके कद और पद की परवाह किए बिना कड़ी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा। गौरतलब है कि हरियाणा में एक दशक से अधिक समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस पिछले 11 वर्षों से राज्य में जिला-ब्लॉक स्तर पर संगठनात्मक ढांचे का अभाव झेल रही है। तीसरी बार विधानसभा चुनाव में हार का एक प्रमुख कारण संगठनात्मक नियुक्तियां न होना माना जा रहा है। 

कोई भी नेता पार्टी आलाकमान द्वारा की जाने वाली संगठनात्मक नियुक्तियों पर आपत्ति नहीं जता सकेगा

राज्य में संगठनात्मक ढांचा तैयार करने के लिए राहुल गांधी द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक जिला अध्यक्षों का पैनल पार्टी आलाकमान को सौंपेंगे और इस पहले की तरह लटकाए रखने की बजाय पार्टी अगले महीने जुलाई में नए जिला अध्यक्षों पर फैसला ले सकती है। इसके अलावा महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल और छात्र संगठन जैसी कार्यकारिणी और पार्टी के अन्य प्रकोष्ठों के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्चस्व की लड़ाई के लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान को देखते हुए पार्टी आलाकमान के निर्देशों की अनदेखी करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। पहले की तरह अब कोई भी नेता पार्टी आलाकमान द्वारा की जाने वाली संगठनात्मक नियुक्तियों पर आपत्ति नहीं जता सकेगा।

घिसे-पिटे नेताओं की बजाय 35 से 55 साल की उम्र के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को सौंपी जाए

गौरतलब है कि इससे पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा गुट कई बार पार्टी आलाकमान द्वारा लिए गए फैसलों से असहमति जाता चुके चुके हैं, जिससे प्रदेश में पार्टी कमजोर हुई है। इस बीच बता दें कि यह बात सामने आई कि राष्ट्रीय नेतृत्व यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर लिए जाने वाले फैसले पर किसी भी गुट का दबाव न हो। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 22 जिलों में 44 पर्यवेक्षकों को नामित किया है, जो पार्टी को नए जिला अध्यक्षों का पैनल भेजेंगे। पार्टी की कोशिश होगी कि अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी एक नेता से बंधे पुराने और घिसे-पिटे नेताओं की बजाय 35 से 55 साल की उम्र के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को सौंपी जाए।

हर जिले से जिला अध्यक्ष के लिए 6 उम्मीदवारों का पैनल बनाया जाएगा

समूह बैठकें करने के अलावा नियुक्त पर्यवेक्षकों ने हर जिले का दौरा कर वरिष्ठ और आम नेताओं से मुलाकात कर फीडबैक लिया है, जिसके आधार पर वे अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे। इस रिपोर्ट में हर जिले से जिला अध्यक्ष के लिए 6 उम्मीदवारों का पैनल बनाया जाएगा। पैनल में महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों और युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला अध्यक्ष तय होने के बाद पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी और प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठों- महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ और एनएसयूआई की नियुक्ति पर भी ध्यान दिया जाएगा।

पार्टी प्रयास करेगी कि संगठन में सभी वर्गों और जातियों को उचित प्रतिनिधित्व मिले

पैनल तैयार करते समय महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों और युवाओं को समान प्राथमिकता दी जाएगी। विरोधी गुटों के प्रमुख नए चेहरों को भी पार्टी में शामिल होने का मौका मिल सकता है। पार्टी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि संगठन में सभी वर्गों और जातियों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। कांग्रेस को संगठनात्मक नियुक्तियों से मजबूती की उम्मीद बातों के क्रम में  यह बताना भी उल्लेखनीय है कि पार्टी ने पिछले 3 लोकसभा, विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय और जिला परिषद चुनाव बिना किसी संगठनात्मक ढांचे के लड़े हैं।

राहुल गांधी के फैसलों से अब प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा दिखाई दे रही

संगठनात्मक ढांचे के अभाव के बावजूद कांग्रेस हरियाणा में 5 लोकसभा और 37 विधानसभा सीटें हासिल करने में सफल रही। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर पार्टी पूरा संगठनात्मक ढांचा लेकर आती तो उसे सत्ता से इतने लंबे राजनीतिक वनवास से नहीं गुजरना पड़ता। राहुल गांधी के फैसलों से अब प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है, उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। आने वाले समय में प्रदेश कांग्रेस पूरी ताकत के साथ मैदान में खड़ी नजर आएगी और अपनी ताकत जुटाएगी। 

Join The Conversation Opens in a new tab
×