प्रदेश सरकार राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नए जिलों और उपमंडलों के गठन की प्रक्रिया तेज कर रही है । इसी सिलसिले में सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की जल्द ही बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नए जिलों के गठन से जुड़ी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। पंचायत मंत्री और समिति के अध्यक्ष कृष्ण पंवार के अनुसार सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2025 तक यह कार्य पूरा कर लिया जाए ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिल सकें।
सीमावर्ती गांवों को एक जिले से हटाकर दूसरे जिले में मिलाने के लिए भी प्रक्रिया चल रही
सरकार जिन शहरों को नए जिला बनाने पर विचार कर रही है, उनमें हांसी, असंध, डबवाली, मानेसर और गोहाना शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय से जिले की मांग उठती रही है और अब जनसंख्या, क्षेत्रफल और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके अलावा, कुछ सीमावर्ती गांवों को एक जिले से हटाकर दूसरे जिले में मिलाने के लिए भी प्रक्रिया चल रही है।
समिति को अब तक करीब 72 आवेदन प्राप्त हुए
इस संबंध में समिति को अब तक करीब 72 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी समीक्षा की जा रही है। कृष्ण पंवार ने यह भी बताया कि जैसे ही जनगणना का कार्य शुरू हुआ, सरकार ने इस प्रक्रिया को और गति दे दी है ताकि नए जिलों और उपमंडलों का सीमांकन जनसंख्या और भूगोल के आधार पर सही ढंग से किया जा सके। प्रदेश के ग्रामीण विकास को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
केंद्र सरकार बनाएगी प्रदेश के 509 गांवों में पंचायत भवन
वहीं प्रदेश के गांवों में रुके हुए विकास कार्य भी अब तेज गति से चलेंगे, जिसके लिए ग्राम पंचायतों को बजट जारी किया जाएगा। पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी गांव बिना पंचायत भवन के ना हो। केंद्र सरकार ने प्रदेश के 509 गांवों में पंचायत भवन बनाने के लिए 125 करोड़ रुपए की राशि दी है।
मंत्री ने बताया कि पंचायत भवनों की ड्राइंग भी केंद्र द्वारा बनाई गई है। उन्होंने बताया कि हर पंचायत भवन में 21 लाख कंस्ट्रक्शन और 4 लाख फर्नीचर हेतु सीधे सरपंच के खाते में भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी ग्रामीण आंचल में विकास बिना भेदभाव के कर रही है। प्रदेश के हर गांव में ई-लाइब्रेरी हो, यह कार्य भी जल्द होगा।
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