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The Haryana Story | ऐतिहासिक तीर्थों को नई पहचान दिलाने और जीर्णोद्धार कराने में सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की  रहेगी अहम भूमिका

ऐतिहासिक तीर्थों को नई पहचान दिलाने और जीर्णोद्धार कराने में सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की रहेगी अहम भूमिका

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को बेहतर बनाने को लेकर हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की कार्यकारिणी में बतौर स्थायी सदस्य शामिल किया जाएगा

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को बेहतर बनाने को लेकर हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की कार्यकारिणी में बतौर स्थायी सदस्य शामिल किया जाएगा। अभी हाल ही में राज्यपाल और मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में आयोजित हुई केडीबी की 82वीं बैठक में इस मसौदे को हरी झंडी दी गई। महाभारत धरा की 48 कोस भूमि में सरस्वती नदी के किनारे बसे गांवों में पौराणिक और ऐतिहासिक तीर्थ हैं, जिनकी विशेष महत्ता है। उन तीर्थों को नई पहचान दिलाने और वहां जीर्णोद्धार कराने को लेकर सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की अहम भूमिका रहेगी।

48 कोस की परिधि में पिहोवा स्थित सरस्वती तीर्थ का विशेष महत्व है। पिहोवा स्थित सरस्वती तीर्थ पर पितरों के लिए श्राद्ध, पिण्ड व तर्पण देने का विधान है। तीर्थ परिसर ही पृथ्वीश्वर महादेव मन्दिर स्थित है जिसका जीर्णोद्धार 18 वी शती ई. में मराठाओं द्वारा किया गया था। सरस्वती के इस पावन तीर्थ पर चैत्रमास की कृष्ण चतुर्दशी पर भारी मेला लगता हैं जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान व पिंडदान के लिए यहां आते हैं। सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कार्यकारिणी में बतौर सदस्य शामिल करने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि तीर्थों के विकास में उनकी अहम भूमिका रहेगी।

वैदिक कालीन सरस्वती नदी किनारें पौराणिक सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं। सरस्वती नदी के किनारे ऐतिहासिक तीर्थ मौजूद हैं। उन तीर्थों के विकास और जीर्णोद्धार की कार्ययोजना में बोर्ड द्वारा महत्वपूर्ण सुझाव दिए जाएंगे। धुम्मन सिंह ने बताया कि बतौर बोर्ड उपाध्यक्ष उन्होंने सरस्वती के किनारे बसे गांवों व ऐतिहासिक स्थलों को विकसित करने की योजना तैयार की है। खासकर पिहोवा और पिपली स्थित सरस्वती को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना है। 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि केडीबी की 82वीं वार्षिक बैठक में राज्यपाल और मुख्यमंत्री नायब सैनी द्वारा केडीबी के स्थायी सदस्यों में हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष को शामिल करने के एजेंडे को मंजूरी दी गई है।

केडीबी और सरस्वती बोडर् द्वारा तीर्थों के जीर्णोद्धार को लेकर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री नायब सैनी का विजन कुरुक्षेत्र को विश्व पटल पर अध्यात्म नगरी के तौर पर नई पहचान दिलाना है। खुद, मुख्यमंत्री ने महाभारत स्थली के विकास को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है। गीता के नाम पर कुरुक्षेत्र के प्रवेश द्वारों का नामकरण करने के साथ और चौक व चौहारों को महाभारत कालीन स्वरूप दिया जाएगा। इसको लेकर, मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि कुरुक्षेत्र के विकास में कोताही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।

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