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The Haryana Story | लंबे इंतजार के बाद हरियाणा कांग्रेस को मिला नेता प्रतिपक्ष और नया प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी ने 53 साल बाद अहीरवाल क्षेत्र से बनाया प्रदेश अध्यक्ष

लंबे इंतजार के बाद हरियाणा कांग्रेस को मिला नेता प्रतिपक्ष और नया प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी ने 53 साल बाद अहीरवाल क्षेत्र से बनाया प्रदेश अध्यक्ष

हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से चौधरी उदयभान को हटाते हुए उनकी जगह पूर्व मंत्री राव नरेंद्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है, साथ ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी दी गई

आखिरकार लंबे इंतजार के बाद हरियाणा कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष और नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया। हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से चौधरी उदयभान को हटाते हुए उनकी जगह पूर्व मंत्री राव नरेंद्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी दी गई है। राव नरेंद्र और भूपेंद्र सिंह हुड्डा 24 अगस्त को बिहार में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में बुलाया गया था और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इसी बैठक में दोनों के नाम पर मुहर लगी। कांग्रेस ने 18 साल बाद गैर दलित को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी है। साल 2007 में फूलचंद मुलाना से कांग्रेस का दलित प्रदेश अध्यक्ष युग शुरू हुआ था। मुलाना सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे थे।

राव नरेंद्र को कांग्रेस हाईकमान ने कई पहलुओं के मद्देनजर यह जिम्मेदारी दी

उसके बाद अशोक तंवर, कुमारी सैलजा और फिर उदयभान प्रदेश अध्यक्ष बने। हरियाणा में लंबे समय से एससी समाज के नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देती जा रही थी और अबकी बार पार्टी ने जातीय समीकरणों और अन्य कहीं पहलुओं को देखते हुए ओबीसी समाज के नेता को यह जिम्मेदारी दी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली अहीरवाल बेल्ट के राव नरेंद्र को कांग्रेस हाईकमान ने कई पहलुओं के मद्देनजर यह जिम्मेदारी दी है। पिछले कई दिन से लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि राव नरेंद्र को कोई जिम्मेदारी मिल सकती है और अंतत: 29 सितंबर को उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का आधिकारिक लेटर जारी हुआ।

पार्टी ने 53 साल बाद अहीरवाल क्षेत्र से नेता चुनते हुए राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में कांग्रेस ने लंबे इंतजार के बाद बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने 53 साल बाद अहीरवाल क्षेत्र से नेता चुनते हुए राव नरेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। साथ ही, लंबे समय से अटका हुआ नेता प्रतिपक्ष का मामला भी सुलझाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक बार फिर से विपक्ष का नेता बनाया है। माना जा रहा है कि राव नरेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा 24 अगस्त को बिहार में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में बुलाया गया था यहीं दोनों के नाम पर मुहर लगी। राव नरेंद्र के नाम पर सहमति बनने की एक वजह यह भी है कि वे कभी किसी गुट से नहीं जुड़े रहे। राव तीन बार विधायक रह चुके हैं। अहीरवाल को मिला 53 साल बाद प्रतिनिधित्व हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र में कांग्रेस का जनाधार लगातार कमजोर होता गया था। 

कांग्रेस ने 18 साल बाद गैर दलित को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी

राव इंद्रजीत के 2014 में भाजपा में शामिल होने के बाद से कांग्रेस यहां लगातार चुनाव हारती रही। इस बार भी अहीरवाल की 12 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 1 पर ही जीत पाई। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष पद पर राव नरेंद्र की ताजपोशी को कांग्रेस ने राजनीतिक पुनर्जीवन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। आखिरी बार 1972 से 1977 तक राव निहाल सिंह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रहे थे। अब 53 साल बाद अहीरवाल को फिर से इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना क्षेत्र की राजनीति को नई दिशा देगा। कांग्रेस ने 18 साल बाद गैर दलित को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी है। 2007 में फूलचंद मुलाना से कांग्रेस का दलित प्रदेश अध्यक्ष युग शुरू हुआ था। मुलाना सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे थे। उसके बाद अशोक तंवर, कुमारी सैलजा और फिर उदयभान प्रदेश अध्यक्ष बने। ये सभी एससी वर्ग से थे। 

अब विपक्ष में उनकी नेतृत्व क्षमता भाजपा के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही

साथ ही कांग्रेस ने लंबे समय से अटके नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर भी फैसला ले लिया है। पार्टी हाईकमान ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विपक्ष का नेता नियुक्त कर दिया है। यह निर्णय कांग्रेस विधायकों में असमंजस की स्थिति खत्म करने वाला माना जा रहा है। हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में सबसे मजबूत चेहरा माने जाते हैं और अब विपक्ष में उनकी नेतृत्व क्षमता भाजपा के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही है। ओबीसी और जाट वोट बैंक पर फोकस राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने यह कदम केवल हरियाणा की राजनीति को ध्यान में रखकर नहीं उठाया है। अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री चेहरा बनाकर ओबीसी वर्ग में मजबूत पकड़ बनाई थी। अब कांग्रेस राव नरेंद्र को आगे कर ओबीसी समीकरण को साधने और भाजपा की बढ़त को चुनौती देने की कोशिश कर रही है। पार्टी इसी रणनीति को बिहार विधानसभा चुनाव तक ले जाने का संकेत भी दे रही है।

कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं

हरियाणा की राजनीति हमेशा जातीय संतुलन पर आधारित रही है। जाट राजनीति के बड़े चेहरे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विपक्ष की कमान और अहीरवाल से राव नरेंद्र को संगठन की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। एक ओर जाट वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की कवायद है, वहीं दूसरी ओर गैर-जाट व खासकर ओबीसी समाज में जगह बनाने का प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों नेता अपने-अपने क्षेत्रों में कांग्रेस का खोया जनाधार वापस लाने में सफल रहते हैं, तो इसका असर प्रदेश की राजनीति पर पड़ना तय है। हालांकि कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं है। इस समय इनेलो जमीनी स्तर पर सक्रिय है और बीजेपी नई-नई घोषणा करने में लगी है। ऐसे में कांग्रेस को न केवल संगठन को एकजुट रखना होगा बल्कि जनता के बीच विश्वसनीय विकल्प के तौर पर खुद को पेश करना होगा।

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