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The Haryana Story | हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस ने की आत्महत्या, साथी अधिकारी हैरान, आखिर जिंदादिल अधिकारी ने खुद की जान क्यों ले ली

हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस ने की आत्महत्या, साथी अधिकारी हैरान, आखिर जिंदादिल अधिकारी ने खुद की जान क्यों ले ली

बताया गया है कि उन्होंने अपने निजी बेसमेंट में जाकर पीएसओ की पिस्टल से खुद को गोली मार ली

हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने मंगलवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या कर ली। बताया गया है कि उन्होंने अपने निजी बेसमेंट में जाकर पीएसओ की पिस्टल से खुद को गोली मार ली। उनकी मौत से साथी अधिकारी भी हैरान हैं कि आखिर इतने जिंदादिल अधिकारी ने अपनी खुद की जान क्यों ले ली। वाई पूरन कुमार 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और फिलहाल रोहतक के सुनारिया स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (पीटीसी) में आईजी के पद पर तैनात थे। बीते दिनों ही उनकी यहां नियुक्ति हुई थी और वे सात अक्टूबर तक अवकाश पर थे। मंगलवार को सुबह वे अपनी बेटी के साथ ग्राउंड फ्लोर पर थे। कुछ देर बाद वे नीचे बेसमेंट में गए और वहां खुद को गोली मार ली।

घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं किया

चंडीगढ़ पुलिस ने घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का माना जा रहा है। पूरन कुमार का करियर हमेशा बहस और चर्चाओं के केंद्र में रहा। वे अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारियों की फील्ड पोस्टिंग को लेकर भी मुखर रहे। फरवरी और जून 2024 में उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को दो पत्र लिखे, जिनमें कहा गया कि हरियाणा में एससी अफसरों को जिम्मेदार फील्ड पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि आयोग को भेजी जाने वाली तिमाही रिपोर्ट राज्य सरकार नहीं भेज रही। विधानसभा चुनाव 2024 के दौरान वाई पूरन कुमार ने साउथ हरियाणा रेंज के आईजी राजेंद्र कुमार के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत की थी।

चुनाव आयोग ने हरियाणा के गृह विभाग से चौबीस घंटे में रिपोर्ट मांगी थी

उनका कहना था कि वह अधिकारी सत्ताधारी पार्टी के करीबी हैं और चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार उन्हें तबादले की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इस शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने हरियाणा के गृह विभाग से चौबीस घंटे में रिपोर्ट मांगी थी। वर्ष 2023 में उन्होंने नौ आईपीएस अधिकारियों द्वारा दो-दो सरकारी मकानों पर कब्जा करने का मामला उजागर किया था। उनकी शिकायत के बाद राज्य सरकार ने जांच की और संबंधित अधिकारियों से एक-एक मकान खाली कराया। इसके बाद सरकार ने आदेश जारी किया कि कोई भी अधिकारी दो सरकारी मकान नहीं रख सकेगा। साल 2024 में उन्होंने अपने पद के अनुरूप नई इनोवा कार न मिलने पर अपनी पुरानी होंडा सिटी कार वापस कर दी थी और तत्कालीन मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन. प्रसाद को पत्र लिखकर अधिकारियों के वाहन अलॉटमेंट सिस्टम पर सवाल उठाए थे।

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