हरियाणा में जारी है दहेज का दंश, रिसर्च में हुए बड़े खुलासे देश में दहेज के लालचियों द्वारा महिलाओं की हत्या करने का मामला आए दिन सामने आते हैं। दहेज के लिए महिलाओं को जहर देकर, फांसी लगाकर या अन्य तरीकों से हत्या करने की बात सुनते आए है। यह सिलसिला दशकों से चला आ रहा जो कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा इस मामले में हरियाणा की स्थिति भी देश के कई अन्य राज्यों से जुदा नहीं है। इसी कड़ी में बता दें की 3 साल तक कंडक्ट किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश में 95% लोग दहेज को सामाजिक रूप से स्वीकार करते हैं जो कि बेहद आश्चर्यजनक और चिंताजनक है।
5 हजार लड़कियां आज भी अविवाहित
सोशल मीडिया पोल के साथ ग्राउंड सर्वे से जो परिणाम सामने आए, वे समाज को झकझोर देने वाले हैं। सर्वे में यह भी सामने आया है कि दहेज नहीं देने के चलते हरियाणा में व्यापक स्तर पर लड़कियां अविवाहित है और उनकी उम्र भी काफी हो चुकी है। दहेज न देने के कारण राज्य में 32 वर्ष से अधिक उम्र की करीब 15 हजार लड़कियां आज भी अविवाहित हैं। सबसे दुखद यह कि 99 प्रतिशत लोगों को दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के बारे में कोई जानकारी नहीं है। तीन साल चले सर्वे में करीब छह हजार लोग बतौर सैंपल शामिल हुए सेल्फी अगेन्स्ट डॉवरी अभियान के तहत पिछले तीन वर्षों में हरियाणा की वर्तमान स्थिति का गहन सर्वेक्षण किया गया। इसमें 2,500 लोग ऑफलाइन और 3,200 लोग ऑनलाइन शामिल हुए।
अभियान सेल्फी अगेन्स्ट डॉवरी चार श्रेणियों में चलाया जा रहा है।
पहली-जो दहेज नहीं लेंगे, वे सेल्फी पोस्ट करें।
दूसरी-जिन्होंने दहेज नहीं लिया, वे गर्व से अपनी कहानी शेयर करें।
तीसरी-जिन्होंने दहेज लिया लेकिन वापस कर दिया, वे सुधार की मिसाल बनें।
चौथी-जो लड़कियां दहेज के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं, उनकी हिम्मत को सलाम।
90 प्रतिशत मामलों में शादी के बाद दहेज की मांग और बढ़ जाती
83 फीसद लोग सामान की सूची बनाकर दहेज मांगते हैं सर्वे में पाया गया कि हरियाणा में 83 प्रतिशत लोग दहेज की इच्छा सूची बनाकर मांगते हैं, 13 प्रतिशत जो मिल जाए उसे स्वीकार कर लेते हैं, 3 प्रतिशत तिगड़ा, आटा-साटा और खरीद-फरोख्त के जरिए घर बसाते हैं, जबकि एक प्रतिशत से भी कम लोग अपनी मर्जी से दहेज नहीं लेते। चौंकाने वाली बात यह है कि 95 प्रतिशत लोग दहेज को सामाजिक रूप से स्वीकार्य मानते हैं। करीब 30 प्रतिशत महिलाएं शादी के बाद न लड़का हुआ, न दहेज लाई जैसे ताने सुनती हैं। पहली श्रेणी के अधिकारियों में भी 97 प्रतिशत दहेज देकर शादी करते हैं। जिन परिवारों में दो-तीन बेटियां पहले से हैं, वहां 90 प्रतिशत मामलों में शादी के बाद दहेज की मांग और बढ़ जाती है।
सेल्फी अगेन्स्ट डॉवरी अभियान के तहत सर्वे कंडक्ट किया
रिसर्चर बोले कि अपर्याप्त जांच और पुलिस की धीमी प्रतिक्रिया, न्यायिक अड़चनें और सबसे बड़ी सामाजिक जागरूकता का अभाव द संस्था सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के संस्थापक प्रो सुनील जागलान जिन्होंने सेल्फी अगेन्स्ट डॉवरी अभियान के तहत सर्वे कंडक्ट किया है, ने कहा कि दहेज के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ रहे कानून तो है, लेकिन न्याय की राह में तीन बड़ी बाधाएं हैं- अपर्याप्त जांच और पुलिस की धीमी प्रतिक्रिया, न्यायिक अड़चनें और सबसे बड़ी सामाजिक जागरूकता का अभाव। वे कहते हैं, कानून कागज पर है, जागरूकता दिल में होनी चाहिए। सुनील जागलान ने अंत में कहा, मैंने दहेज के खिलाफ लड़ाई शुरू की। अब समाज को यह मानना चाहिए कि दहेज लेने वाले कभी भी मर्डर करने वाले बन सकते हैं। दहेज असल में रिश्ते का मर्डर है। हमें सीधे शब्दों में कहना शुरू करना पड़ेगा। वे सभी से अपील करते हैं कि सेल्फी लें, संकल्प लें।
घर में तनाव होना स्वाभाविक
सेल्फी अंगेस्ट डॉवरी अभियान के बेसलाइन सर्वे के पांच वस्तुनिष्ठ प्रश्न: 1. लोग कहते हैं, शादी में लड़की वाले को कुछ देना चाहिए, तभी रिश्ता मजबूत होता है-आप क्या सोचते हैं? 2. अगर बेटे की शादी हो और लड़की वाले खुद कुछ देना चाहें, तो आप... 3. कुछ लोग कहते हैं, शादी में गिμट लेना तो कानून करता है-ये सही है? 4. अगर बहू के मायके से कुछ कम आए, तो घर में तनाव होना स्वाभाविक है? 5. कहा जाता है, जितना मायके से लाएगी, उतना ही घर में इज्जत मिलेगी-ये बात... हरियाणा में दहेज प्रथा को लेकर एक सर्वे में सामने कुछ बड़े खुलासे 97 फीसद क्लास वन अधिकारी भी दहेज देकर शादी करते। दहेज न देने के कारण राज्य में 32 वर्ष से अधिक उम्र की करीब 15 हजार लड़कियां आज भी अविवाहित हैं।
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