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The Haryana Story | जिनेवा में 'विश्व शांति के लिए ध्यान' विषय पर श्री श्री रविशंकर का विशेष संबोधन, ध्यान को अपनाने का आह्वान

जिनेवा में 'विश्व शांति के लिए ध्यान' विषय पर श्री श्री रविशंकर का विशेष संबोधन, ध्यान को अपनाने का आह्वान

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा मुख्यालय से आज के अशांत और बेचैन होते संसार के लिए ध्यान को अपनाने का आह्वान किया

आर्ट ऑफ़ लिविंग की हरियाणा स्टेट मीडिया को- ऑर्डिनेटर कुसुम धीमान ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर, पिछले वर्ष दुनिया भर से 85 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ ध्यान कर एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया था। इसी पृष्ठभूमि में, वैश्विक आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी नेता गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा मुख्यालय से आज के अशांत और बेचैन होते संसार के लिए ध्यान को अपनाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में गुरुदेव ने कहा कि ध्यान केवल व्यक्तिगत कल्याण की साधना नहीं है, बल्कि उन समाजों के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है, जो तनाव, संघर्ष, अनिश्चितता और भावनात्मक पीड़ा से जूझ रहे हैं।

चिंता, बर्नआउट और अकेलेपन की समस्या बढ़ रही

दूसरे विश्व ध्यान दिवस के उत्सवों की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र जिनेवा में 'विश्व शांति के लिए ध्यान' विषय पर गुरुदेव के विशेष संबोधन से हुई। यह कार्यक्रम भारत के स्थायी मिशन, जिनेवा द्वारा द आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से आयोजित किया गया। ऐसे समय में, जब सभी आयु वर्गों और भौगोलिक सीमाओं के पार चिंता, बर्नआउट और अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है, गुरुदेव का संदेश इस बात पर केंद्रित था कि स्थायी समाधान केवल बाहरी उपायों से नहीं, बल्कि मानव मन को स्थिर करने से भी संभव है। हरियाणा स्टेट मीडिया को- ऑर्डिनेटर कुसुम धीमान ने बताया कि आधुनिक युग के बड़े हिस्से में, पश्चिमी दुनिया में ध्यान को हाशिए पर रखा गया। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व ध्यान दिवस के प्रस्ताव का समर्थन

1980 के दशक की शुरूआत में, जब आंतरिक विज्ञान पर चर्चा के लिए मुख्यधारा में बहुत कम स्थान था, तब गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने उस यात्रा की शुरूआत की जिसने धीरे-धीरे दुनिया को भीतर की ओर देखने की दिशा दशा दी। शिक्षा, संघर्ष समाधान, किसान कल्याण, कारागार सुधार, युवा नेतृत्व, कॉपोर्रेट तनाव प्रबंधन और समुदायों के पुनर्निर्माण जैसे क्षेत्रों में ध्यान को केंद्र में रखते हुए, वे 182 से अधिक देशों तक पहुँचे। अपने संबोधन में गुरुदेव ने उन 192 देशों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व ध्यान दिवस के प्रस्ताव का समर्थन किया। किसी आंतरिक साधना का इतने व्यापक सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और संस्थागत स्तर पर स्वीकार किया जाना अपने आप में दुर्लभ उपलब्धि है।

21 दिसंबर को लाखों लोगों के गुरुदेव के साथ जुड़ने की संभावना

इस वर्ष भी 21 दिसंबर को लाखों लोगों के गुरुदेव के साथ जुड़ने की संभावना है, जब वे न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित प्रतिष्ठित ओक्यूलस से रात 8:30 बजे (भारतीय समयानुसार) एक संक्षिप्त ध्यान और परिवर्तनकारी सत्र का मार्गदर्शन करेंगे। एक ऐसी दुनिया में जो शायद ही कभी रुकती है, यह क्षण सामूहिक स्थिरता का होगा - एक साझा सॉस, और यह स्मरण कि तेज बदलाव और अनिश्चितता के बीच भी, शांति की कुंजी आज भी मानव मन के भीतर ही निहित है।

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